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सम्मान कार्यक्रम से सियासत गर्म

डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने 101 बटुकों का किया सम्मान, शंकराचार्य विवाद के बीच दिए बड़े संकेत

उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक आज अपने आवास पर 101 बटुकों को सम्मानित किया। ब्रजेश पाठक ने पत्नी नम्रता पाठक के साथ वैदिक मंत्रोच्चार के बीच बटुकों का तिलक कर स्वागत किया।

डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने 101 बटुकों का किया सम्मान शंकराचार्य विवाद के बीच दिए बड़े संकेत

Brajesh Pathak Honors 101 Young Brahmins Amid Political Buzz |

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक आज अपने आवास पर 101 बटुकों को सम्मानित किया। ब्रजेश पाठक ने पत्नी नम्रता पाठक के साथ वैदिक मंत्रोच्चार के बीच बटुकों का तिलक कर स्वागत किया, पुष्प वर्षा की और हाथ जोड़कर प्रणाम किया। इस दौरान ब्रजेश पाठक के बंगले का पूरा वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक नजर आया।

प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य और शिष्यों के कथित अपमान के बाद कदम

डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के इस कदम को प्रयागराज माघ मेले के दौरान शंकराचार्य अविमुक्तेशवरानंद और उनके शिष्यों के कथित अपमान और बदसलूकी के बाद उपजे विवाद के डैमेज कंट्रोल के रूप में देखा जा रहा है। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने गुरुवार को अपने सरकारी आवास पर 101 बटुक ब्राह्मणों का सम्मान कर सियासी हलकों में नई चर्चा छेड़ दी।  इस आयोजन को प्रयागराज में 18 जनवरी को हुए उस विवाद के बाद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिसमें शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के एक शिष्य के साथ पुलिस द्वारा कथित अभद्रता का वीडियो वायरल हुआ था।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में बटुक शिष्य के साथ पुलिस की अभद्रता

बता दें कि गत 18 जनवरी को प्रयागराज में आयोजित माघ मेले के दौरान गंगा स्नान के लिए जाते हुए शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ पुलिस और मेला प्रशासन द्वारा अशोभनीय कार्रवाई देखने को मिली थी। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के एक शिष्य को पुलिसकर्मियों द्वारा चोटी पकड़कर घसीटते और मारते हुए दिखाया गया था। इन दृश्यों को लेकर धार्मिक और सामाजिक संगठनों में जबरदस्त नाराजगी देखने को मिली थी।

संत-महात्माओं और ब्राह्मण संगठनों ने बताया था सनातन धर्म का अपमान

घटना के बाद विभिन्न संत-महात्माओं और ब्राह्मण संगठनों ने बटुकों और दंडी स्वामियों के अपमान को आस्था और सनातन का अपमान बताया था। लेकिन भारी विरोध के बावजूद मेला प्रशासन ने घटना को लेकर आधिकारिक रूप से कोई खेद प्रकट नहीं किया था। सोशल मीडिया और राजनीतिक मंचों पर भी यह मुद्दा अभी भी गाहे बगाहे चर्चा में रहता है।

ब्रजेश पाठक ने कही दोषियों पर कार्रवाई की बात, योगी सरकार से अलग नजरिया

उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने बाद में मीडिया से बातचीत में कहा था कि "किसी बटुक चोटी खींचना महापाप है" और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर शंकराचार्य या संबंधित संत का नाम नहीं लिया है। पाठक के इस बयान को लोग सीएम योगी आदित्यनाथ से अलग लाइन पर देख रहे हैं।

केशव मौर्य का समर्थन और सीएम योगी की सख्त टिप्पणी

इससे पहले राज्य के दूसरे डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने भी शंकराचार्य के अपमान के लिए कुंभ मेला प्रशासन के कृत्य को गलत बताया था। हालांकि यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ कभी भी शंकराचार्य के बचाव में खड़े नजर नहीं आये। सीएम योगी आदित्यनाथ ने इस मामले में बजट सत्र के दौरान बिना नाम लिए संकेतों में टिप्पणी की थी कि कोई भी स्वयं को शंकराचार्य नहीं लिख सकता। उनके इस बयान को लेकर विपक्ष, विशेषकर समाजवादी पार्टी, सरकार पर हमलावर है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि जो लोग दूसरों से प्रमाण पत्र मांगते हैं, यदि उनसे ही प्रमाण पत्र मांग लिया जाए तो वे क्या दिखाएंगे?

सम्मान समारोह को राजनीतिक संकेत

सीएम योगी के रूख के विपरीत शंकराचार्य और बटुकों के पक्ष में दिये गये दोनो डिप्टी सीएम के बयान काफी दिनों से चर्चा में हैं। लेकिन कुछ संगठनों ने इसे पर्याप्त नहीं माना है। ब्राह्मण समाज के एक वर्ग ने अपेक्षा जताई कि वे खुलकर संतों के पक्ष में बोलें। ऐसे में लखनऊ स्थित उनके आवास पर 101 बटुक ब्राह्मणों का सम्मान समारोह कई राजनीतिक संकेत देता हुआ नजर आया।

ब्राह्मण मतदाताओं को साधने का कदम

यूपी की सियासत के जानकार इस कार्यक्रम को प्रदेश की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों के बीच ब्राह्मण मतदाताओं को अपने पाले में बनाये रखने के संदर्भ में देख रहे हैं। मालूम हो कि कुछ दिनो पहले भी भाजपा के कुछ नाराज ब्राह्मण विधायकों की होटल में हुई बैठक ने काफी सुर्खियां बटोरी थीं। वहीं मायावती लगातार ब्राह्मण समाज के समर्थन में बयान देती रही हैं। हाल के दिनों में बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी द्वारा ब्राह्मण समाज को साधने के प्रयास तेज किए गए हैं। ऐसे में उपमुख्यमंत्री का यह कदम राजनीतिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है।

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