भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में 'लाइफलाइन' कहे जाने वाले बड़ा तालाब के संरक्षण को लेकर प्रशासन की कार्रवाई अब सवालों के घेरे में है।
भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में 'लाइफलाइन' कहे जाने वाले बड़ा तालाब के संरक्षण को लेकर प्रशासन की कार्रवाई अब सवालों के घेरे में है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के सख्त आदेशों के बाद, जिला प्रशासन और नगर निगम ने तालाब के 50 मीटर के दायरे (FTL - Full Tank Level) में बने अवैध निर्माणों के खिलाफ अभियान तो शुरू किया है, लेकिन कार्रवाई की निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे हैं।
वाउंड्रीवाल को ही तोड़ा, मकान रहे अछूते
रसूखदारों की आलीशान कोठियों और बंगलों को सुरक्षित छोड़कर, प्रशासन ने केवल उनकी बाउंड्रीवॉल और फेंसिंग पर बुलडोजर चलाया। टीटी नगर वृत्त के सेवनियां गौंड और गौरा गांव में राजस्व टीम अतिक्रमण हटाने पहुंची। कार्रवाई के दौरान यातायात एडीसीपी (ADCP) का फार्म हाउस भी अतिक्रमण की जद में चिह्नित किया गया, जिसके लिए तहसीलदार से समय मांगा गया है।
क्या है पूरा मामला
भोपाल जिला प्रशासन ने बड़ा तालाब के कैचमेंट एरिया और एफटीएल (FTL) से 50 मीटर के भीतर लगभग 300 से 350 अवैध निर्माणों को चिह्नित किया है। सोमवार को प्रशासन का दस्ता टीटी नगर के अंतर्गत आने वाले इलाकों में पहुंचा। हालांकि, मौके पर मौजूद लोगों और स्थानीय सूत्रों का कहना है कि प्रशासन केवल उन्हीं हिस्सों को तोड़ रहा है जिससे मूल इमारत को नुकसान न हो।
दिखावे की कार्रवाई, आलाशान कोठी सही-सलामत
इन इलाकों में कई प्रभावशाली व्यक्तियों, अधिकारियों और व्यापारियों के फार्म हाउस और बंगले बने हुए हैं। राजस्व विभाग की टीम जब यहाँ कार्रवाई करने पहुंची, तो भारी विरोध का सामना करना पड़ा। रिपोर्ट के अनुसार, कई बड़े निर्माणों के केवल बाहरी ढांचों या बाउंड्री को गिराकर खानापूर्ति की गई है, जबकि आलीशान कोठियां अब भी जस की तस खड़ी हैं।
एडीसीपी का फार्म हाउस भी आया अतिक्रमण की जद में
इस कार्रवाई में सबसे चौंकाने वाला मामला एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी (यातायात एडीसीपी) के फार्म हाउस का सामने आया है। जांच में पाया गया कि यह निर्माण भी प्रतिबंधित दायरे में है। हालांकि, मौके पर मौजूद टीम ने तत्काल कार्रवाई के बजाय अधिकारी को अपना पक्ष रखने या निर्माण हटाने के लिए मोहलत दे दी है।
21 अप्रैल तक जारी रहेगा अभियान
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि यह अभियान 21 अप्रैल तक जारी रहेगा और सभी चिह्नित अतिक्रमणों को हटाया जाएगा। चरणबद्ध तरीके से पहले सरकारी जमीन और फिर निजी जमीन पर बने अवैध ढांचों को गिराया जा रहा है। अधिकारियों ने 'रसूखदारों को बचाने' के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि नियमानुसार सभी को नोटिस दिए गए हैं और कार्रवाई कानून के दायरे में हो रही है।
कैचमेंट एरिया में पक्के निर्माण बहाव को रोकते हैं
पर्यावरणविदों का मानना है कि यदि प्रशासन ने केवल बाउंड्रीवॉल गिराकर अपनी जिम्मेदारी इतिश्री कर ली, तो बड़ा तालाब के अस्तित्व को बचाना मुश्किल होगा। तालाब के कैचमेंट एरिया में पक्के निर्माण पानी के प्राकृतिक बहाव को रोक रहे हैं, जो भविष्य के लिए बड़ा खतरा है।
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