मध्य प्रदेश में खराब सड़कों को लेकर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में गंभीर खामियां उजागर हुई हैं।
भोपाल। मध्य प्रदेश में खराब सड़कों को लेकर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में गंभीर खामियां उजागर हुई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश की कई नेशनल और स्टेट हाईवे सहित टोल सड़कों पर रफनेस इंडेक्स तय मानकों से काफी अधिक पाया गया है। सड़कों की सतह ज्यादा उबड़-खाबड़ होने से हादसों का खतरा बढ़ रहा है।
इन इलाकों की स्थिति चिंताजनक
कैग की हालिया जांच में विशेष रूप से इंदौर–उज्जैन, जावरा–नयागांव और भोपाल–देवास मार्ग की स्थिति चिंताजनक बताई गई है। इन मार्गों पर सड़क की गुणवत्ता और रखरखाव मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए। रिपोर्ट में कहा गया है कि तय समय पर मरम्मत और नियमित मॉनिटरिंग नहीं होने से सड़कों की हालत बिगड़ी है।
रिफरेंस इंडेक्स का असर चालकों पर
रिपोर्ट के अनुसार रफनेस इंडेक्स बढ़ने का सीधा असर वाहन चालकों की सुरक्षा पर पड़ता है। ऊबड़-खाबड़ सतह के कारण वाहन नियंत्रण से बाहर हो सकते हैं, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है। खासकर भारी वाहनों और दोपहिया चालकों के लिए यह स्थिति ज्यादा जोखिमभरी है।
तकनीकी मानकों पर सुधार की जरूरत
कैग ने संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिए हैं कि सड़कों को निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप सुधार किया जाए। साथ ही निर्माण और रखरखाव कार्यों की गुणवत्ता की नियमित जांच सुनिश्चित करने को कहा गया है।
समय पर सुधारात्मक कदम उठाना जरूरी
विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय में दुर्घटनाओं की संख्या और बढ़ सकती है। प्रदेश में सड़क सुरक्षा को लेकर पहले भी चिंता जताई जाती रही है, ऐसे में कैग की यह रिपोर्ट प्रशासन के लिए एक अहम चेतावनी मानी जा रही है।
यह भी पढ़ें: https://www.primenewsnetwork.in/state/mp-to-boost-ayurveda-government-approves-8-new-medical-colleges/147117
आठ नए मेडिकल कॉलेजों के लिए 490 करोड़ रुपये मंजूर, 2028 तक होंगे शुरू