प्रयागराज। ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तिवेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ झूंसी थाने में बीएनएस की सात गंभीर धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने जांच प्रक्रिया तेज कर दी है।
प्रयागराज। ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तिवेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ झूंसी थाने में बीएनएस (भारतीय न्याय संहिता) की सात गंभीर धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने जांच प्रक्रिया तेज कर दी है। विवेचक ने केस डायरी और एफआईआर की कॉपी कलेक्ट कर ली है।
मेडिकल परीक्षण पुलिस की पहली प्राथमिकता
पुलिस की सबसे पहली और बड़ी प्राथमिकता अब उन दो नाबालिग बच्चों का मेडिकल परीक्षण कराना है, जिन्होंने शंकराचार्य और उनके शिष्य मुकुंदानंद पर यौन शोषण के आरोप लगाए हैं। अधिकारियों के मुताबिक मेडिकल रिपोर्ट इस मामले में सबसे अहम साक्ष्य साबित होगी और इसी के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
महाकुंभ और माघ मेले की घटनाओं की हो रही जांच
बताया जा रहा है कि कथित घटनाएं महाकुंभ 2025 और माघ मेला 2026 के दौरान हुईं। पुलिस इन दोनों आयोजनों के समय की गतिविधियों की बारीकी से पड़ताल कर रही है, ताकि पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने लाई जा सके।
शिविर के अंदर की परिस्थितियों पर फोकस
जांच एजेंसियां इस बात का पता लगाने में जुटी हैं कि क्या वास्तव में शिविर के भीतर मर्यादाओं का उल्लंघन हुआ था। इसके लिए वहां मौजूद लोगों से पूछताछ और अन्य साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया जारी है।
आगे की कार्रवाई मेडिकल रिपोर्ट पर निर्भर
अधिकारियों का कहना है कि मेडिकल परीक्षण की रिपोर्ट मिलने के बाद ही मामले में आगे की कार्रवाई की दिशा तय होगी। फिलहाल पुलिस हर पहलू को ध्यान में रखते हुए साक्ष्य जुटाने में लगी है।
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