मध्यप्रदेश की राजधानी में ईद से पहले एक अजीबोगरीब फतवे ने धार्मिक और सामाजिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है।
भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी में ईद से पहले एक अजीबोगरीब फतवे ने धार्मिक और सामाजिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। त्योहार कमेटी ने इसे लेकर प्रशासन और संबंधित धार्मिक निकायों से हस्तक्षेप की अपील की है।
फतवा से विवाद
जानकारी के मुताबिक, नायब मुफ्ती सैयद अहमद खान काश्मी द्वारा जारी एक फतवे ने इस विवाद को जन्म दिया है। फतवे में शरई नियमों का हवाला देते हुए कहा गया है कि यदि किसी व्यक्ति को यूरिन इन्फेक्शन या प्रोस्टेट संबंधी बीमारी है, तो वह स्वयं की नमाज तो पढ़ सकता है, लेकिन दूसरों को नमाज नहीं पढ़ा सकता अर्थात इमाम नहीं बन सकता।
मुस्लिम संगठन ने जताई आपत्ति
मुस्लिम संगठनों की आपत्ति: इस फतवे के बाद मुस्लिम संगठनों, विशेषकर ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी, ने कड़ी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि ईद जैसे बड़े त्योहार से पहले इस तरह का फतवा जारी करना भ्रम और विवाद पैदा करने वाला है। ताज-उल-मसाजिद एशिया की सबसे बड़ी मस्जिदों में से एक है, जहाँ लाखों लोग ईद की नमाज अदा करते हैं। इस फतवे के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि यदि शहर काजी अस्वस्थता के कारण नमाज नहीं पढ़ाते, तो उनकी जगह नेतृत्व कौन करेगा।
संगठनो ने की जांच की मांग
संगठनों ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि यह फतवा किन परिस्थितियों में और किस मंशा से जारी किया गया है।
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