सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट पुलिस की टीम ने बुधवार को साइबर अपराधियों को मदद करने वाले एक संगठित अंतरराज्यीय नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए तीन लोगों को गिरफ्तार किया है।
नई दिल्ली। सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट पुलिस की टीम ने बुधवार को अपराध में संलिप्त एक संगठित अंतरराज्यीय नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। ये संगठन साइबर धोखाधड़ी में इस्तेमाल के लिए आपराधिक गिरोहों को बैंक अकाउंट, सिम कार्ड और एटीएम कार्ड उपलब्ध कराकर मदद करता था।
चाय विक्रेता से ₹90 हजार की ठगी से शुरू हुई जांच
साइबर पुलिस ने यह जांच दिल्ली के साउथ पटेल नगर में एक चाय बेचने वाले की शिकायत के बाद शुरू की। शिकायत के मुताबिक एक अज्ञात व्यक्ति फिनटेक कर्मचारी बनकर उसकी दुकान पर आया और उसके मोबाइल फोन की सेटिंग्स/KYC अपडेट करने के बहाने धोखे से डिवाइस तक पहुंच बना ली और उसके बैंक खाते से ₹90 हजार धोखाधड़ी करके ट्रांसफर कर लिए।
पुलिस की स्पेशल टीम ने कई राज्यों में की छापेमारी
पीड़ित की शिकायत पर 15 मई को साइबर सेंट्रल पुलिस थाने में FIR दर्ज की गई। SHO/साइबर इंस्पेक्टर योगराज दलाल की निगरानी और ACP/OPS/सेंट्रल पदम सिंह राणा के पर्यवेक्षण में सब-इंस्पेक्टर रविंदर कुमार, हेड कांस्टेबल दीपक और हेड कांस्टेबल जय किशन की एक विशेष पुलिस टीम गठित की गई। तकनीकी इनपुट और स्थानीय खुफिया जानकारी के आधार पर टीम ने पंचकूला (हरियाणा), ज़ीरकपुर (मोहाली) और हरियाणा तथा पंजाब के आसपास के इलाकों में कई जगहों पर छापेमारी की। लगातार तकनीकी निगरानी और फील्ड वेरिफिकेशन के बदौलत आखिरकार 19 मई को तीन आरोपियों को पकड़ने में सफलता मिली। फिलहाल पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
तकनीकी जांच और CCTV फुटेज से खुला आरोपियों का राज
पुलिस की जांच में पता चला कि धोखाधड़ी से हासिल की गई रकम एक सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक खाते में ट्रांसफर की गई थी जिसका इस्तेमाल साइबर धोखाधड़ी से मिले पैसों को आगे भेजने के लिए किया जाता था। तकनीकी निगरानी, लाभार्थी खाते का वेरिफिकेशन, बैंक लेनदेन का विश्लेषण, CCTV फुटेज की जांच, डिजिटल प्रोफाइलिंग और वित्तीय लेन-देन की जांच के बाद आखिरकार आरोपियों की पहचान हो गई।
तीन आरोपी गिरफ्तार, अलग-अलग भूमिकाएं आईं सामने
पुलिस टीम ने पंचकूला (हरियाणा), ज़ीरकपुर (मोहाली) और आसपास के इलाकों में कई जगहों पर छापेमारी 19 मई को तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान विशेष सिंह (22), निवासी पंचकूला, हरियाणा के रूप में हुई है। इसने लाभार्थी बैंक खाताधारक के रूप में काम किया और साइबर धोखाधड़ी के लिए बैंक खाता किट तथा सिम कार्ड उपलब्ध कराए। सचिन मौर्य (22), निवासी पंचकूला, जिसने एक सूत्रधार (facilitator) के रूप में काम किया और बैंक खाता किट इकट्ठा करके उन्हें अन्य गुर्गों तक पहुंचाया और आशीष शर्मा (27), जो हिमाचल प्रदेश के ऊना ज़िले के कोटला कल्लन का रहने वाला है। इसने अलग-अलग जगहों पर मौजूद साइबर धोखाधड़ी करने वाले साथियों को कई बैंक अकाउंट किट उपलब्ध कराने वाले (हैंडलर और सप्लायर) के तौर पर काम किया।
कमीशन के बदले उपलब्ध कराते थे बैंकिंग संसाधन
पूछताछ के दौरान आरोपियों ने बताया कि उन्हें बैंक अकाउंट, ATM कार्ड, रजिस्टर्ड SIM कार्ड और बैंकिंग क्रेडेंशियल्स का इंतज़ाम करने और उन्हें सप्लाई करने के बदले कमीशन मिलता था। इन चीज़ों का इस्तेमाल साइबर जालसाज़ चोरी किए गए पैसों को इधर-उधर भेजने और निकालने के लिए करते थे। जांच में पता चला कि ये तीनों, अलग-अलग राज्यों में फैले संगठित साइबर धोखाधड़ी गिरोहों के लिए बिचौलिए और सप्लाई-चेन में मदद करने वाले के तौर पर काम करते थे।
मोबाइल जांच में मिले डिजिटल सबूत
ज़ब्त मोबाइल फ़ोन की डिजिटल जांच से कई अहम सबूत मिले हैं। इनमें बैंक अकाउंट की सप्लाई और कमीशन के बंटवारे से जुड़ी WhatsApp चैट, कई संदिग्ध साथियों की संपर्क जानकारी, Instagram पर हुई बातचीत, 'म्यूल बैंक अकाउंट' (धोखाधड़ी के लिए इस्तेमाल होने वाले बैंक अकाउंट) की जानकारी और संदिग्ध डिजिटल पेमेंट की जानकारी शामिल हैं।
NCRP से जुड़े हो सकते हैं कई और मामले
पुलिस ने बताया कि जांच के दौरान जिन मोबाइल नंबरों, पैसे पाने वाले बैंक अकाउंट और सोशल मीडिया हैंडल की पहचान हुई है, उनके बारे में शक है कि वे 'नेशनल साइबरक्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल' (NCRP) पर दर्ज की गई साइबर धोखाधड़ी की दूसरी शिकायतों से भी जुड़े हो सकते हैं। टीम ने इन जानकारियों को इधर-उधर भेजने के लिए इस्तेमाल किए गए चार मोबाइल फ़ोन बरामद किए हैं। बाकी बचे सह-आरोपियों की पहचान करने, पैसे पाने वाले और बैंक अकाउंट का पता लगाने और दूसरे पीड़ितों की पहचान करने के लिए आगे की जांच जारी है। (ANI)
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