ग्वालियर। कहते हैं कोई काम छोटा नहीं होता। फर्क सिर्फ स्किल का है। इसी से जुड़ी एक वाकया सामने आय़ा है।
ग्वालियर। कहते हैं कोई काम छोटा नहीं होता। फर्क सिर्फ स्किल का है। इसी से जुड़ी एक वाकया सामने आय़ा है। इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद युवाओं का सपना बहुराष्ट्रीय कंपनी (MNC) में ऊंचे पैकेज पर नौकरी पाने का होता है। लेकिन ग्वालियर के युवा इंजीनियर यश पाराशर ने इस पारंपरिक रास्ते से हटकर कुछ अलग करने का साहस दिखाया। उन्होंने नौकरी के सुरक्षित विकल्प को छोड़ खुद का स्टार्टअप 'धोबीगो' शुरू किया है। यह शहर में लॉन्ड्री सर्विस के क्षेत्र में एक नई पहचान बना रहा है।
नौकरी की कशमकश से निकला 'धोबीगो' का आइडिया
मोबाइल एप्लीकेशन पर आधारित इस स्टार्टअप का विचार यश को उनके अपने दैनिक जीवन में आ रही दिक्कतों को देखकर आया। अपनी छोटी सी नौकरी के दौरान उन्हें हर दिन फॉर्मल कपड़े जैसे सूट आदि पहनने होते थे। उन्हें धुलवाने या ड्राई क्लीन कराने में न केवल बहुत पैसा खर्च होता था, बल्कि काफी समय भी बर्बाद होता था।
चुनौतियां भी सामने आई
यश ने महसूस किया कि शहर में मौजूद कई नामी ब्रांड काफी महंगे हैं और आम लोगों या कामकाजी युवाओं के लिए किफायती नहीं हैं। इसी समस्या का समाधान निकालने के लिए उन्होंने तकनीक और सेवा को जोड़कर 'धोबीगो' की नींव रखी।
'धोबीगो' की यह है खासियत
ग्राहक मोबाइल ऐप के जरिए घर बैठे अपनी सुविधा अनुसार कपड़े पिकअप और डिलीवरी शेड्यूल कर सकते हैं। बड़े ब्रांड्स की तुलना में कम दाम में बेहतर सर्विस देने की पेशकश। इसके साथ भागदौड़ भरी जिंदगी में युवाओं और वर्किंग प्रोफेशनल्स के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर है।
प्रेरण का स्त्रोत
आज यह स्टार्टअप न केवल एक उद्यमी (Entrepreneur) के रूप में स्थापित कर रहा है, बल्कि शहर के अन्य युवाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गया है कि कैसे एक साधारण समस्या को एक सफल बिजनेस मॉडल में बदला जा सकता है।
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