मध्य प्रदेश की नर्मदापुरम सेंट्रल जेल देश की पहली जेल बनी, जो कैदियों को मेडिकल या कोर्ट में जाने पर GPS-आधारित इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम से ट्रैक करती है।
नर्मदापुरम। मध्य प्रदेश की नर्मदापुरम सेंट्रल जेल देश की पहली जेल बन गई है जो GPS-बेस्ड इलेक्ट्रॉनिक मॉनिटरिंग सिस्टम का इस्तेमाल करके कैदियों को मेडिकल ट्रीटमेंट या कोर्ट में पेशी के लिए ले जाते समय ट्रैक करती है। इस खास ट्रैकिंग सिस्टम का नाम EPTS (इलेक्ट्रॉनिक प्रिज़नर ट्रैकिंग सिस्टम) रखा गया है। लगभग दो साल की तैयारी और टेस्टिंग के बाद इसे प्रायोगिक तौर पर लागू किया गया है। अब कैदियों की मॉनिटरिंग सिर्फ़ सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि सैटेलाइट टेक्नोलॉजी के ज़रिए भी की जा रही है।
कैदियों के हाथ या पैर में बांधे जाएंगे
दरअसल, हर साल राज्य में 25 से 50 कैदी पुलिस या जेल गार्ड की हथकड़ी तोड़कर भाग जाते हैं, जिससे सिक्योरिटी सिस्टम पर सवाल उठते हैं। इसी चुनौती से निपटने के लिए EPTS सिस्टम बनाया गया। यह SIM-बेस्ड GPS डिवाइस सैटेलाइट से कनेक्ट होता है और कैदी की लाइव लोकेशन को सर्वर और रजिस्टर्ड मोबाइल फोन पर लगातार अपडेट करता रहता है। इसे कैदी के हाथ या पैर में सुरक्षित रूप से बांधा जा सकता है। GPS ट्रैकर का वज़न 150 ग्राम है, जबकि 2 mm मोटी मेटल शीट से बना 250 ग्राम का कवर इसकी सिक्योरिटी पक्का करता है। कुल वज़न लगभग 400 ग्राम है। बैटरी बैकअप 9 से 10 दिन का है। और हर यूनिट की कीमत 4,000 से 10,000 रुपये के बीच है।
कैदियों पर हर पल GPS की नजर
यह सिस्टम कैदी की हर एक्टिविटी को रिकॉर्ड करता है, जैसे कि वह कब निकला, कब रुका, कितनी स्पीड से चला और कितनी दूरी तय की। अगर भागने के दौरान कोई गाड़ी इस्तेमाल की गई है, तो गाड़ी के स्टार्ट होने और रुकने की जानकारी भी मिल सकती है। अगर डिवाइस से छेड़छाड़ होती है या बैटरी खत्म हो जाती है, तो आखिरी लोकेशन के साथ अलर्ट मैसेज तुरंत कंट्रोल रूम को भेज दिया जाता है। पूरा ट्रैक रिकॉर्ड हिस्ट्री में सेव हो जाता है। वाटरप्रूफ, शॉकप्रूफ और न्यूमेरिक लॉक से सुरक्षित यह डिवाइस कुछ ही मिनटों में भागे हुए कैदी का पता लगा सकता है।
देश की पहली सैटेलाइट निगरानी वाली जेल
यह टेक्नोलॉजिकल पहल जेल अधीक्षक संतोष सोलंकी और असिस्टेंट जेल अधीक्षक हितेश बंडिया की गाइडेंस में डेवलप की गई। डिवाइस का सफलतापूर्वक प्रायोगिक टेस्ट किया जा चुका है। स्टाफ मेंबर्स के पैरों में ट्रैकर बांधकर टेस्टिंग करने पर चलना, रुकना, स्पीड और लाइव लोकेशन समेत सभी पैरामीटर्स एक्यूरेट पाए गए। अब इसे कैदियों पर प्रयोग किया जा रहा है, खासकर मेडिकल चेकअप और कोर्ट में पेशी के दौरान, इसके साथ ही, सेंट्रल जेल नर्मदापुरम देश की पहली जेल बन गई है जिसने सैटेलाइट-बेस्ड इलेक्ट्रॉनिक मॉनिटरिंग सिस्टम को असरदार तरीके से लागू किया है।
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