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गिरफ्तारी से पहले अयोध्या में साधु बनकर रह रहा था

कटनी का निर्दयी गैंगस्टर किशोर तिवारी उर्फ किस्सू गिरफ्तार

किशोर तिवारी उर्फ किस्सू की शुरुआत कटनी में एक साधारण कंपाउंडर के रूप में हुई थी। समय के साथ वह एक निर्दयी गैंगस्टर बन गया।

कटनी का निर्दयी गैंगस्टर किशोर तिवारी उर्फ किस्सू गिरफ्तार

Gangster Kishore Tiwari aka Kissu Arrested in Ayodhya |

कटनी। किशोर तिवारी उर्फ किस्सू की शुरुआत कटनी में एक साधारण कंपाउंडर के रूप में हुई थी। समय के साथ वह एक निर्दयी गैंगस्टर बन गया। उसने अपने दुश्मनों को इतनी क्रूरता से खत्म किया कि लोग उसके सामने आने से भी डरते थे। कई गंभीर आपराधिक मामलों में तो पुलिस भी उसके खिलाफ सीधे कार्रवाई करने से हिचकती थी।

अयोध्या में भेष बदलकर रहता था, गिरफ्तार

अयोध्या में राम मंदिर के पास स्थित हनुमानगढ़ी में हमेशा की तरह साधु-संत और भक्तों की भीड़ लगी हुई थी। उन्हीं के बीच भगवा वस्त्र पहने एक साधु घूम रहा था। उसकी लंबी सफेद दाढ़ी थी, माथे पर तिलक और हाथ में माला थी। अचानक माहौल बदल गया। भीड़ में मौजूद पुलिस अधिकारी आगे बढ़े और उसे रोक लिया। यह वही व्यक्ति था जो कई वर्षों से अयोध्या में रह रहा था और रोज की तरह सरयू नदी में स्नान करने जा रहा था। यह व्यक्ति वास्तव में कौन था। जवाब बेहद खौफनाक निकला।

नए साल की रात की हत्या

कहानी की शुरुआत 31 दिसंबर 1986 से होती है। राजेंद्र, जो भिलाई में काम करता था, अपने माता-पिता से मिलने कटनी आया हुआ था। रात करीब 8 बजे, एक कार्यक्रम से लौटते समय नगर निगम कार्यालय के पास उसकी मुलाकात एक पुराने परिचित से हो गई। दोनों के बीच बहस हो गई और कुछ अन्य लोग भी उसमें शामिल हो गए। विवाद खत्म करने के लिए उन्होंने साथ मिलकर नए साल की पार्टी करने का फैसला किया।

शव को पास की चूने की भट्टी में फेंका

वे शराब लेकर शहर से बाहर एक ढाबे पर पहुंच गए। लेकिन शराब पीते समय बहस फिर से शुरू हो गई। गुस्से में राजेंद्र ने एक व्यक्ति को थप्पड़ मार दिया। झगड़े के दौरान साथ मौजूद एक युवक ने लकड़ी का लट्ठा उठाकर राजेंद्र के सिर पर जोरदार वार किया, जिससे उसका सिर फट गया। यह युवक था किशोर तिवारी उर्फ किस्सू। जब राजेंद्र भागने की कोशिश करने लगा तो उसे पकड़ लिया गया। उसे कार में जबरन बैठाकर कटनी के पास जुकेही के जंगलों में ले जाया गया। वहां उसे बेरहमी से पीटा गया जब तक कि उसकी मौत नहीं हो गई। इसके बाद उसके शव को पास की चूने की भट्टी (लाइमस्टोन फर्नेस) में फेंक दिया गया।

जले हुए अवशेष से मिला सुराग

जब राजेंद्र घर नहीं लौटा तो परिवार चिंतित हो गया। उसके भाई प्रकाश ने खोजबीन शुरू की और पता लगाया कि आखिरी बार उसे विवेक और कुछ अन्य लोगों के साथ देखा गया था। 1 जनवरी 1987 को गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई। जांच के दौरान पता चला कि जिस कार का इस्तेमाल हुआ था, उसे जुकेही से लौटते देखा गया था। इसके बाद पुलिस को सूचना मिली कि वहां की एक चूने की भट्टी में जले हुए कंकाल जैसे अवशेष मिले हैं। जांच में जली हुई हड्डियों के टुकड़े बरामद किए गए।

क्रूरता का सिलसिला

यह पहली घटना नहीं थी। इससे पहले 1985 में जबलपुर के राजेश उर्फ राजू सोनी के गायब होने के बाद भी उसी भट्टी में जले हुए अवशेष मिले थे। जांच में पता चला कि राजेश एक कॉलेज छात्रा को परेशान करता था और उसका पीछा करता था। वह लड़की किस्सू की चचेरी बहन थी। जब किस्सू को यह बात पता चली तो उसने राजेश का अपहरण किया, उसे जुकेही के जंगल में ले गया, गोली मारी और फिर जिंदा ही चूने की भट्टी में फेंक दिया, जहां वह जलकर मर गया।

कंपाउंडर से अपराध सरगना तक

इन घटनाओं से साफ हो गया कि किस्सू कोई साधारण अपराधी नहीं बल्कि बेहद क्रूर और योजनाबद्ध गैंगस्टर था। 1980 के दशक में कटनी और जबलपुर में उसका नाम ही लोगों में डर पैदा करने के लिए काफी था। शुरुआत में वह कंपाउंडर का काम करता था, लेकिन इस पेशे में उसे न सम्मान मिला और न ही पर्याप्त पैसा। धीरे-धीरे वह संगठित अपराध की दुनिया में उतर गया। उसका मुख्य धंधा था कटनी रेलवे डिपो से निकलने वाले बेकार डीजल को इकट्ठा करके अवैध रूप से बेचना। इसके अलावा उसने चूना खदानों के ठेके भी ले लिए। जो भी उसके काम में बाधा डालता, उसे वह हिंसक तरीके से खत्म कर देता।

डर की वजह से गवाह चुप

कई घटनाओं के बावजूद पुलिस के लिए ठोस सबूत जुटाना मुश्किल था। किस्सू का आतंक इतना था कि गवाह सामने आने से डरते थे। उसका नाम ही लोगों को चुप कराने के लिए काफी था।

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