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हाईकोर्ट ने चीन लहसुन पर जवाब मांगा

हाईकोर्ट ने चीन के प्रतिबंधित लहसुन की देश में बिक्री पर केंद्र से मांगा जवाब

लखनऊ। प्रतिबंध के बावजूद खतरनाक लहसुन जैसे उत्पादों के चीन से देश में धड़ल्ले से आयात पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने सख्त रुख अपनाया है।

हाईकोर्ट ने चीन के प्रतिबंधित लहसुन की देश में बिक्री पर केंद्र से मांगा जवाब

Allahabad High Court |

लखनऊ। प्रतिबंध के बावजूद खतरनाक लहसुन जैसे उत्पादों के चीन से देश में धड़ल्ले से आयात पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने केंद्र सरकार के अधिवक्ता को 26 व 27 सितंबर 2024 को दिए गए विस्तृत आदेशों के तहत जवाब पेश करने का निर्देश दिया है।  मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की खंडपीठ ने यह आदेश स्थानीय अधिवक्ता मोतीलाल यादव की जनहित याचिका पर दिया। याचिकाकर्ता ने कोर्ट में दाखिल याचिका में कहा है कि वर्ष 2014 से इस लहसुन की बिक्री प्रतिबंधित है। इसके बावजूद प्रतिबंधित लहसुन समेत तमाम खतरनाक चीनी उत्पाद बाजारों में बिक रहा है। हाईकोर्ट ने सितंबर 2024 को दिए आदेश में प्रदेश के खाद्य सुरक्षा आयुक्त और लखनऊ के डीएम को इस संबध मे कार्रवाई का आदेश दिया था। 

चीन लहसुन पर HC ने केंद्र से जवाब मांगा

केंद्र सरकार ने चाइनीज लहसुन को स्वास्थ्य के लिए हानिकारक मानते हुए 10 साल पहले इस पर बैन लगा दिया था। लेकिन प्रतिबंध के बावजूद चीनी लहसुन देश में धड़ल्ले से बिक रहे हैं। इसी को लेकर स्थानीय अधिवक्ता मोतीलाल यादव ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में जनहित याचिका दाखिल की थी। इसमें कहा गया था, सस्ता होने की वजह से चाइनीज लहसुन बाजार में बिक रहा है। याची ने कोर्ट को बताया कि लखनऊ, प्रयागराज, वाराणसी और गोरखपुर समेत कई जिलों की मंडियों में पिछले 3-4 महीनों से 25-30 हजार रुपए क्विंटल के भाव से खतरनाक लहसुन बिक रहा है। इन्हीं मंडियों में चीन से भी लहसुन आ रहा है। यह 18 से 20 हजार रुपए क्विंटल बिक रहा है। सस्ता होने की वजह से इसकी ज्यादा खपत है। इस पर रोक को लेकर विभाग कार्रवाई का सिर्फ दिखावा कर रहा है। याची ने बतौर साक्ष्य विभिन्न अखबारों में प्रकाशित खबरों को याचिका के साथ लगाकर इसपर सख्त प्रतिबंध लगाने का आग्रह किया था।

केंद्र सरकार के वकील ने इस मामले में सुनवाई के दौरान कोर्ट के आदेशों के क्रम में केंद्र से जानकारी लेकर जवाब पेश करने के लिए समय देने का आग्रह किया। इस पर कोर्ट ने समय देते हुए मामले की अगली सुनवाई 30 मार्च को निर्धारित की है।

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