विकसित शहरों में पार्क पर्यावरण के लिहाज से आवश्यक होने के साथ ही आम शहरियों, पक्षियों और अन्य जीवों की लाइफलाइन होते हैं।
लखनऊ। विकसित शहरों में पार्क पर्यावरण के लिहाज से आवश्यक होने के साथ ही आम शहरियों, पक्षियों और अन्य जीवों की लाइफलाइन होते हैं। इनका व्यवसायिक प्रयोग पर्यावरण संतुलन के लिए कतई उचित नहीं है। राजधानी लखनऊ में स्थित विशाल जनेश्वर मिश्र पार्क के व्यावसायिक उपयोग के प्रस्ताव पर हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ यह टिप्पणी की है। साथ ही हाईकोर्ट ने लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) को इस प्रस्ताव पर पुनर्विचार करने की सलाह दी है।
पार्क के व्यावसायिक उपयोग पर पुनर्विचार की सलाह
हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने एलडीए को जनेश्वर मिश्र पार्क के व्यावसायिक उपयोग पर पुनर्विचार करने की सलाह दी है। अदालत ने यह भी कहा कि ऐसी गतिविधियों का पार्क में रहने वाले पक्षियों और अन्य जीवों पर बुरा असर पड़ता है। यह पर्यावरण के लिए भी ठीक नहीं है।
धर्मपाल यादव की जनहित याचिका पर दिया सुझाव
न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति अबधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने यह सुझाव धर्मपाल यादव की जनहित याचिका पर दिया है। याची ने शहर के जनेश्वर मिश्रा पार्क के व्यावसायिक उपयोग पर रोक लगाने की मांग की है। कोर्ट ने इस बात पर हैरानी जताई कि लखनऊ का प्रसिद्ध जनेश्वर मिश्र पार्क अभी तक उन पार्कों की आधिकारिक सूची में शामिल नहीं है, जिन्हें यूपी पार्क, खेल के मैदान और खुली जगह (संरक्षण और विनियमन) अधिनियम, 1975 के तहत सुरक्षा प्राप्त है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि पार्क को तुरंत इस सूची में शामिल करने पर निर्णय लिया जाए।
प्रदेशभर के पार्कों और खुले मैदानों का मांगा ब्यौरा
इसके साथ ही अदालत ने प्रदेश के सभी मंडलायुक्तों, जिलाधिकारियों तथा विकास प्राधिकरणों को आदेश दिया है कि वे पार्कों, खेल मैदानों और खुले स्थानों का विवरण तैयार कर 10 अप्रैल तक प्रस्तुत करें। इसके साथ ही उन्हें यूपी पार्क, खेल के मैदान और खुली जगह (संरक्षण और विनियमन) अधिनियम, 1975 की सूची में शामिल करें। अगली सुनवाई 20 अप्रैल को होगी।
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