भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। विवाद तब शुरू हुआ जब भागीरथपुर और अडानी समूह का नाम चर्चा में आया।
भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। विवाद तब शुरू हुआ जब भागीरथपुर और अडानी समूह का नाम चर्चा में आया। विधासभा में सत्ता औऱ विपक्ष में तू-तू, मैं- मैं की एक झलक...। कैलाश विजयवर्गीय बोले- औकात में रहें नेता प्रतिपक्ष..। इस पर उमंग सिंघार (नेता प्रतिपक्ष) का पलटवार, "मैं तुम्हें औकात दिखा दूंगा...।" नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार अडानी समूह पर मेहरबान है और उन्हें सवा लाख करोड़ रुपये देने की तैयारी है। उन्होंने दावा किया कि सरकारी फाइलें अडानी के दफ्तर में देखी जा रही हैं। इस बयान पर संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और सिंघार के बीच व्यक्तिगत छींटाकशी शुरू हो गई। विवाद इतना बढ़ा कि सदन की कार्यवाही को तीन बार स्थगित करना पड़ा। कांग्रेस ने इसे आदिवासियों का अपमान बताया। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने दोनों पक्षों को शांत कराते हुए कहा कि आज सदन में सीमाएं तोड़ी गई हैं। हालांकि, बाद में दोनों पक्षों ने इस व्यवहार पर खेद जताया।
इंदौर के भागीरथपुरा कांड पर भी तीखी तकरार
विपक्ष ने इसे 'सरकारी हत्या' करार देते हुए नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला के इस्तीफे की मांग की।
मुआवजे पर भी बहस
विपक्ष ने सवाल उठाया कि जब सामान्य मौतों पर 4 लाख का मुआवजा मिलता है, तो यहाँ केवल 2 लाख क्यों दिया जा रहा है। उन्होंने मुआवजे की राशि बढ़ाने की मांग की। सरकार के अनुसार 22 मौतें हुई हैं, जबकि विपक्ष का दावा है कि मरने वालों की संख्या 35 से अधिक है।
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