इंदौर। इंदौर नगर निगम का विशेष सम्मेलन शनिवार को उस समय राजनीतिक अखाड़े में तब्दील हो गया, जब 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' (महिला आरक्षण बिल) के मुद्दे पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच भारी हंगामा हुआ।
इंदौर। इंदौर नगर निगम का विशेष सम्मेलन शनिवार को उस समय राजनीतिक अखाड़े में तब्दील हो गया, जब 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' (महिला आरक्षण बिल) के मुद्दे पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच भारी हंगामा हुआ। संसद में बिल के अटकने के बाद, नगर निगम के इस सम्मेलन में माहौल पूरी तरह से गर्माया रहा।
ऐसे बदला एजेंडा...धन्यवाद प्रस्ताव से निंदा प्रस्ताव तक
मूल रूप से, यह विशेष सम्मेलन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति 'आभार और धन्यवाद प्रस्ताव' पारित करने के लिए बुलाया गया था। हालांकि, जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू हुई, माहौल पूरी तरह से बदल गया। लोकसभा में महिला आरक्षण बिल के गिर जाने से नाराज भाजपा पार्षदों और महापौर ने अपना रुख आक्रामक कर लिया। परिणामस्वरूप, जिसे एक सामान्य धन्यवाद प्रस्ताव होना था, उसे 'निंदा प्रस्ताव' में बदल दिया गया और बहुमत के साथ इसे सदन में पारित भी कर दिया गया।
काले कपड़ों में 'शक्ति प्रदर्शन'
विपक्ष के खिलाफ अपना विरोध जताने के लिए मेयर पुष्यमित्र भार्गव और भाजपा पार्षद विशेष रूप से काले कपड़ों में सदन पहुंचे थे। यह न केवल एक राजनीतिक विरोध था, बल्कि महिला आरक्षण बिल के समर्थन में एक शक्ति प्रदर्शन भी था। सदन के अंदर आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला और भावनाएं उबाल पर रहीं।
पक्ष-विपक्ष में हुई तीखी नोकझोंक
भाजपा की तरफ से मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार देश की महिलाओं को उनका हक दिलाने के लिए संविधान संशोधन बिल लेकर आई थी, लेकिन विपक्षी दलों ने इसका विरोध किया। भाजपा ने आरोप लगाया कि जो दल हमेशा महिला सशक्तिकरण की बात करते हैं, उन्होंने ही इस ऐतिहासिक बिल को गिराने का काम किया है।
दूसरी तरफ नेता प्रतिपक्ष चिंटू चौकसे ने भाजपा पर पलटवार करते हुए कहा कि भाजपा की मंशा महिला वर्ग को सशक्त करने की नहीं है। विपक्ष का तर्क था कि जो कानून पहले ही प्रक्रिया में हैं, उन्हें लागू करने में सरकार क्यों हिचकिचा रही है? साथ ही, विपक्ष ने बिल में एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग की महिलाओं के लिए स्पष्ट प्रावधान न होने जैसे सवाल भी उठाए।
प्रस्तावित मैराथन भी हुई निरस्त
महिला आरक्षण बिल के समर्थन में इंदौर में एक मैराथन का भी आयोजन किया गया था। लेकिन संसद में बिल के अटक जाने की खबर के बाद, मैराथन को भी निरस्त करना पड़ा, जिससे प्रतिभागियों में निराशा रही। यह घटनाक्रम स्पष्ट करता है कि संसद में महिला आरक्षण बिल को लेकर हुई राजनीतिक रस्साकशी का असर अब स्थानीय निकायों की राजनीति में भी साफ देखा जा रहा है। सदन में हुए इस हंगामे और निंदा प्रस्ताव ने राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है।
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