प्राइम न्यूज़ – एक कसम, राष्ट्र प्रथम
Breaking News

मध्य प्रदेश के निर्यात पर ईरान-यूएस संकट

ईरान-अमेरिका युद्ध से मध्य प्रदेश के निर्यात पर संकट के बादल

भोपाल। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य और कूटनीतिक तनाव ने मध्य प्रदेश के कृषि और औद्योगिक निर्यात की कमर तोड़ दी है।

ईरान-अमेरिका युद्ध से मध्य प्रदेश के निर्यात पर संकट के बादल

Madhya Pradesh Exports |

भोपाल। ​ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य और कूटनीतिक तनाव ने मध्य प्रदेश के कृषि और औद्योगिक निर्यात की कमर तोड़ दी है। समुद्री मार्गों, विशेष रूप से 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) में अनिश्चितता के कारण राज्य से होने वाले करोड़ों रुपये के निर्यात पर काले बादल मंडरा रहे हैं।

​बंदरगाह पर अंटके हुए कई उत्पाद

​युद्ध की स्थिति के कारण प्रदेश के कई महत्वपूर्ण निर्यात उत्पाद बंदरगाहों पर अटके हुए हैं या उनके ऑर्डर रद्द हो रहे हैं। इमसें मध्य प्रदेश के बासमती चावल की खाड़ी देशों (Middle East) में भारी मांग रहती है। शिपमेंट रुकने से व्यापारियों के पास स्टॉक जमा हो गया है और भुगतान अटकने का डर सता रहा है। इसी तरह राज्य का 'बनाना बेल्ट' (बड़वानी, धार और बुरहानपुर) सबसे ज्यादा प्रभावित है। ईरान भारतीय केलों का बड़ा खरीदार है। निर्यात रुकने से स्थानीय मंडियों में केले के दाम ₹2000-2100 प्रति क्विंटल से गिरकर ₹1200-1300 तक आ गए हैं। इसी के साथ, इंदौर और आसपास के क्षेत्रों से होने वाला कपड़ों का निर्यात भी ठप पड़ गया है। फार्मा सेक्टर पर भी असर पड़ा है, जो वैश्विक स्तर पर दवाइयां भेजता है, लॉजिस्टिक्स और शिपिंग खर्च बढ़ने से संकट में है।

​​शिपिंग लागत में भारी उछाल, जोखिम भी बढ़ा

समुद्री रास्तों पर बढ़ते खतरे के कारण कंटेनर का किराया (Freight Charges) कई गुना बढ़ गया है। बताया जा रहा है कि जो कंटेनर पहले $2,000 में जाता था, अब उसकी लागत $10,000 तक पहुंच गई है। युद्ध क्षेत्र होने के कारण बीमा कंपनियां शिपमेंट का बीमा करने से कतरा रही हैं, जिससे व्यापारियों के लिए जोखिम बढ़ गया है। अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग चैनलों पर असर पड़ने से निर्यातकों को भुगतान मिलने में देरी हो रही है।

घरेलू बाजार में खपाया जा रहा, लागत निकालना मुश्किल

​निर्यात रुकने से उत्पाद अब घरेलू मंडियों में खपाया जा रहा है, जिससे बाजार में आपूर्ति बढ़ गई है और कीमतें गिर गई हैं। इससे किसानों को लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है। व्यापारियों को डर है कि यदि युद्ध लंबा चला, तो कई विदेशी खरीदार ऑर्डर स्थायी रूप से रद्द कर सकते हैं।

यह भी पढ़े: भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट

https://www.primenewsnetwork.in/india/india-forex-reserves-see-sharp-drop/149143

Related to this topic: