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जबलपुर: 5 अस्पताल रद्द, 121 क्लीनिक बंद

जबलपुर में नियमों की अनदेखी, 5 अस्पतालों का रजिस्ट्रेशन रद्द व 121 क्लीनिक बंद

जबलपुर। जिले में स्वास्थ्य विभाग ने नियमों का उल्लंघन करने वाले निजी चिकित्सा संस्थानों पर कड़ी कार्रवाई की है।

जबलपुर में नियमों की अनदेखी 5 अस्पतालों का रजिस्ट्रेशन रद्द व 121 क्लीनिक बंद

Hospital Shut down |

जबलपुर। जिले में स्वास्थ्य विभाग ने नियमों का उल्लंघन करने वाले निजी चिकित्सा संस्थानों पर कड़ी कार्रवाई की है। नर्सिंग होम शाखा द्वारा की गई इस कार्रवाई में 5 प्रमुख निजी अस्पतालों का पंजीयन निरस्त कर दिया गया है, जबकि जिले के 121 क्लीनिकों के संचालन पर भी रोक लगा दी गई है।

नियमें की अनदेखी पर ​लापरवाही बर्दाश्त नहीं

नर्सिंग होम शाखा प्रभारी डॉ. आदर्श विश्नोई ने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य सेवाओं में नियमों का पालन सर्वोपरि है और किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कुल 55 अस्पतालों की जांच में से 5 अस्पताल बंद कर दिए गए हैं। इनमें से 2 ने स्वयं तालाबंदी की, जबकि 1 ने नवीनीकरण के लिए आवेदन ही नहीं किया था।

​121 क्लीनिक हुए बंद

जिले में कुल 240 निजी क्लीनिकों का नवीनीकरण होना था, जिनमें से 121 क्लीनिक अब बंद हो गए हैं।

​इसलिए हुई यह कार्रवाई

​स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, निजी क्लीनिकों और अस्पतालों को प्रत्येक तीन वर्ष में अपने पंजीयन का नवीनीकरण (Renewal) कराना अनिवार्य होता है। इस बार की कार्रवाई के पीछे 240 में से 89 क्लीनिकों ने समय सीमा के भीतर नवीनीकरण के लिए आवेदन ही प्रस्तुत नहीं किया, 32 क्लीनिक ऐसे पाए गए जिनके पास नवीनीकरण के लिए आवश्यक कानूनी दस्तावेज अधूरे थे और जिन 5 अस्पतालों के रजिस्ट्रेशन कैंसिल किए गए हैं, उनमें से कुछ (जैसे संकल्प हॉस्पिटल) ने नगर निगम से सत्यापित दस्तावेज जमा नहीं किए थे, जबकि 'एससी गुप्ता मेमोरियल हॉस्पिटल' में निरीक्षण के दौरान योग्य स्टाफ की कमी पाई गई।

​इन अस्पतालों पर पड़ा असर

​जिन अस्पतालों का संचालन अब बंद रहेगा, उनमें मुख्य रूप से नामदेव नर्सिंग होम, संकल्प हॉस्पिटल, और एससी गुप्ता मेमोरियल हॉस्पिटल व रिसर्च सेंटर जैसे नाम शामिल हैं। इसके साथ स्वास्थ्य विभाग ने साफ कर दिया है कि बिना वैध पंजीयन और पूर्ण दस्तावेजों के किसी भी अस्पताल या क्लीनिक को मरीजों का इलाज करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। जो क्लीनिक बंद किए गए हैं, वे अब कानूनी रूप से मरीजों को सेवाएं नहीं दे सकेंगे।

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