ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, 14 मार्च की मध्यरात्रि से सूर्य देव कुंभ राशि को छोड़कर मीन राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य के मीन राशि में प्रवेश करते ही 'मीन संक्रांति' के साथ मलमास की शुरुआत हो जाएगी।
भोपाल। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, 14 मार्च की मध्यरात्रि से सूर्य देव कुंभ राशि को छोड़कर मीन राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य के मीन राशि में प्रवेश करते ही 'मीन संक्रांति' के साथ मलमास (खरमास) की शुरुआत हो जाएगी। इसकी समाप्ति 14 अप्रैल 2026 को सुबह 9:30 बजे होगी। पूरे एक माह तक खरमास का प्रभाव रहेगा।
ये कार्य होंगे वर्जित
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मलमास की इस अवधि में सूर्य का तेज कम हो जाता है, इसलिए किसी भी प्रकार के शुभ और मांगलिक कार्यों को करने की मनाही होती है। इस समय शादियों पर पूरी तरह रोक रहेगी। उपनयन संस्कार नहीं किए जाएंगे। बच्चों के मुंडन जैसे कार्य टाल दिए जाएंगे। नए घर में प्रवेश या नींव पूजन, सगाई, नया व्यवसाय शुरू करना आदि वर्जित होगा।
इसलिए लगता है खरमास
जब सूर्य देव बृहस्पति की राशि (धनु या मीन) में प्रवेश करते हैं, तो इसे 'खरमास' या 'मलमास' कहा जाता है। चूंकि बृहस्पति देवताओं के गुरु हैं, सूर्य के उनके घर में जाने से गुरु का प्रभाव कम हो जाता है, जिससे शुभ कार्यों के लिए समय अनुकूल नहीं माना जाता।
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