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सीमित संसाधन नहीं बनता राह में रोड़ा...

सीमित संसाधन नहीं बनता राह में रोड़ा, बेटियों ने रचा इतिहास

शिवपुरी। कहावत है कि 'हौसले बुलंद हों तो गरीबी कभी आड़े नहीं आती'। शहर की एक साधारण सब्जी विक्रेता...

सीमित संसाधन नहीं बनता राह में रोड़ा बेटियों ने रचा इतिहास

सीमित संसाधन नहीं बनता राह में रोड़ा, बेटियों ने रचा इतिहास |

शिवपुरी। कहावत है कि 'हौसले बुलंद हों तो गरीबी कभी आड़े नहीं आती'। शहर की एक साधारण सब्जी विक्रेता की दो प्रतिभाशाली बेटियों ने इसे सच साबित किया है। चंचल कुशवाह और प्रीति कुशवाह ने मध्य प्रदेश बोर्ड की परीक्षा में कृषि संकाय (Agriculture Stream) में पूरे प्रदेश में प्रथम और द्वितीय स्थान प्राप्त कर जिले का नाम रोशन किया है।

​चंचल 493 के साथ आई प्रथम

चंचल कुशवाह ने 500 में 493 अंक प्राप्त कर प्रदेश में प्रथम स्थान (Topper) हासिल किया। इसके साथ प्रीति कुशवाह ने 500 में से 488 अंक लाकर प्रदेश की मेरिट सूची में दूसरा स्थान प्राप्त किया।

बयां की संघर्ष की दास्तां

ये दोनों बहनें शिवपुरी के करौंदी क्षेत्र की रहने वाली हैं। इनके पिता, लालाराम कुशवाह, परिवार का भरण-पोषण करने के लिए बाजार में सब्जी बेचते हैं। बेटियों ने बताया कि कई बार घर की आर्थिक स्थिति इतनी खराब थी कि किताबें खरीदने तक के पैसे नहीं होते थे। ऐसे कठिन समय में उनके पिता ने दूसरों से कर्ज लेकर उनकी पढ़ाई जारी रखी और किताबें लाकर दीं।

भर आए खुशी के आंसू

परिणाम घोषित हुआ तब पिता बाजार में सब्जी बेच रहे थे। दोनों बेटियां अपनी माँ सुनीता कुशवाह के साथ स्कूल पहुँचीं। जैसे ही उन्होंने अपना रिजल्ट देखा, माँ की आँखों में खुशी के आँसू आ गए।

​भविष्य पर नजर, 'कृषि वैज्ञानिक' बनने का सपना

अपनी इस शानदार सफलता के बाद दोनों बहनों ने अपने भविष्य के लक्ष्य को लेकर भी स्पष्टता दिखाई। उन्होंने साझा किया कि वे आगे चलकर कृषि वैज्ञानिक (Agricultural Scientist) बनना चाहती हैं। वे खेती-किसानी की आधुनिक तकनीकों पर काम कर देश के किसानों की मदद करना चाहती हैं। चंचल और प्रीति कहती है, पापा ने हमें कभी अहसास नहीं होने दिया कि हम गरीब हैं। उन्होंने कर्ज लेकर भी हमारी पढ़ाई पूरी कराई।

अब हम मेहनत करके उनका नाम और ऊंचा करना चाहते हैं। ​यह सफलता उन सभी विद्यार्थियों के लिए एक प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं।

10वीं रिजल्ट में बड़े शहर पिछड़े, छोटे जिलों ने गाड़े सफलता के झंडे

मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल (MPBSE) द्वारा घोषित 10वीं के परीक्षा परिणामों में इस बार एक चौंकाने वाला बदलाव देखने को मिला है। जहाँ आमतौर पर बड़े शहरों का दबदबा रहता था, वहीं इस साल ग्रामीण और जनजातीय बहुल जिलों ने बाजी मारी है।

​अनूपपुर बना प्रदेश का अव्वल जिला

जनजातीय बहुल जिला अनूपपुर 93.85% रिजल्ट के साथ पूरे प्रदेश में प्रथम स्थान पर रहा है।

​राजधानी भोपाल की रही खराब स्थिति

राजधानी भोपाल के प्रदर्शन में भारी गिरावट दर्ज की गई है। भोपाल प्रदेश के जिलों की रैंकिंग में 46वें स्थान पर खिसक गया है, जहाँ का कुल पास प्रतिशत केवल 64.20% रहा।

इंदौर का मेरिट में कम प्रतिनिधित्व

प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर से इस बार केवल 2 छात्र ही स्टेट मेरिट सूची (Top-10) में अपनी जगह बना पाए हैं। इंदौर 67.56% रिजल्ट के साथ 41वें नंबर पर रहा। बड़े महानगरों का प्रदर्शन इस बार काफी निराशाजनक रहा है। ​ग्वालियर 60.87% के साथ 49वें स्थान पर रहा। जबलपुर में 73.86% के साथ 31वें स्थान पर रहा।

​जनजातीय जिलों का रहा दबदबा

​इस बार की टॉप-10 जिला रैंकिंग में 7 ऐसे जिले शामिल हैं, जो आदिवासी बाहुल्य या दूरस्थ क्षेत्र माने जाते हैं। इनमें अनूपपुर के अलावा अलीराजपुर, मंडला, झाबुआ, बालाघाट, बड़वानी और डिंडौरी ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। यह परिणाम दर्शाते हैं कि प्रदेश के दूर-दराज के क्षेत्रों और सरकारी स्कूलों में शिक्षा के स्तर में सुधार हो रहा है, जबकि बड़े शहरों के छात्र इस बार उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाए।

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