भोपाल। मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल (MPBSE) ने आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए अपनी नई प्रवेश और...
भोपाल। मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल (MPBSE) ने आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए अपनी नई प्रवेश और परीक्षा नीति घोषित कर दी है। इस बार बोर्ड ने नियमों में बड़े बदलाव किए हैं, जिनका सीधा असर प्रदेश के लाखों छात्रों और उनके अभिभावकों पर पड़ेगा। नीति में मूल रूप से परीक्षा शुल्क में बढ़ोत्तरी और मूल्यांकन पद्धति में बदली गई है।
10वीं के छात्रों को छह विषयों में उत्तीर्ण होना अनिवार्य
बोर्ड ने कक्षा 10वीं के छात्रों के लिए वर्षों से चली आ रही 'बेस्ट ऑफ फाइव' योजना को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। अब छात्रों के लिए सभी 6 विषयों में उत्तीर्ण होना अनिवार्य होगा। पहले छात्र एक विषय में अनुत्तीर्ण होने के बावजूद पांच विषयों के अंकों के आधार पर पास मान लिए जाते थे, लेकिन अब रिजल्ट की गणना सभी विषयों के अंकों को मिलाकर की जाएगी।
इसके साथ बोर्ड ने विभिन्न शुल्कों में 25% से 80% तक की भारी बढ़ोतरी की है। इससे मध्यम और गरीब वर्ग के परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा। नामांकन और अन्य संबद्ध शुल्कों में भी व्यापक बदलाव किए गए हैं।
मूल्यांकन प्रक्रिया में सख्ती
नई नीति के तहत आंतरिक मूल्यांकन (Internal Assessment) और मुख्य परीक्षा के अंकों के सामंजस्य को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं, ताकि बोर्ड परीक्षाओं की गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धा को बढ़ाया जा सके।
क्या कहता है बोर्ड?
शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि 'बेस्ट ऑफ फाइव' योजना से छात्रों में एक विषय (अक्सर गणित या अंग्रेजी) के प्रति अरुचि बढ़ रही थी। पूर्ण ज्ञान और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के मानकों के अनुरूप छात्रों को तैयार करने के लिए सभी विषयों की अनिवार्यता आवश्यक है। शुल्क वृद्धि का कारण प्रशासनिक खर्चों और डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली को अपडेट करना बताया जा रहा है।
छात्र संगठन और अभिभावकों में रोष
इस फैसले के बाद छात्र संगठनों और अभिभावक संघों में रोष देखा जा रहा है। उनका तर्क है कि एक तरफ महंगाई बढ़ रही है, वहीं दूसरी तरफ फीस में 80% तक की बढ़ोतरी अनुचित है। साथ ही, 'बेस्ट ऑफ फाइव' खत्म होने से परीक्षा परिणाम के प्रतिशत में गिरावट आने की आशंका भी जताई जा रही है। छात्र अब सत्र् 2026-27 के लिए नए पाठ्यक्रम और परीक्षा पैटर्न के अनुसार तैयारी करें। अब किसी भी विषय को "वैकल्पिक" या "कम महत्वपूर्ण" मानकर छोड़ना भारी पड़ सकता है।
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