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जनहित याचिका पर हुई सुनवाई

दिव्यांग बच्चों के अधिकारों पर हाई कोर्ट सख्त, स्कूलों को निष्कासन पर तत्काल रोक

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने जबलपुर के दो निजी स्कूलों (विजडम वैली स्कूल और जीडी गोयनका स्कूल) द्वारा दिव्यांग छात्रों को स्कूल से निकालनेपर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।

दिव्यांग बच्चों के अधिकारों पर हाई कोर्ट सख्त स्कूलों को निष्कासन पर तत्काल रोक

MP High Court Stops Schools from Expelling Special Needs Students |

जबलपुर (मध्य प्रदेश)। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने दिव्यांग (स्पेशल) बच्चों के अधिकारों की रक्षा करते हुए एक बड़ा और संवेदनशील फैसला सुनाया है। मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की खंडपीठ ने जबलपुर के दो निजी स्कूलों (विजडम वैली स्कूल और जीडी गोयनका स्कूल) द्वारा दिव्यांग छात्रों को स्कूल से निकालनेपर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।

अदालत ने मौलिक अधिकार का हनन बताया

सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने स्पष्ट रूप से कहा कि विशेष बच्चों के साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अदालत ने स्कूलों के इस व्यवहार को अत्यंत गंभीर माना और इसे उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया।

पारित किया अंतरिम आदेश

कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में दोनों स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे दिव्यांग बच्चों को बाहर न निकालें। कोर्ट ने इस आदेश के पालन की जिम्मेदारी जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) को सौंपी है। साथ ही, कोर्ट ने जबलपुर के सभी स्कूलों में पढ़ रहे 'स्पेशल बच्चों' (Children with Special Needs) का विस्तृत ब्योरा और स्थिति रिपोर्ट भी तलब की है।

जनहित याचिका पर हुई सुनवाई

यह आदेश जबलपुर निवासी सौरभ सुबैया द्वारा दायर एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए दिया गया है। याचिका में आरोप लगाया गया था कि जबलपुर के अधिकांश स्कूलों में दिव्यांग बच्चों को पढ़ाने के लिए न तो विशेष शिक्षक (Special Educators) नियुक्त हैं और न ही उनके लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा (Infrastructure) मौजूद है, जो कि दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 और शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) 2009 का खुला उल्लंघन है।

अगली सुनवाई 29 अप्रैल को

न्यायालय ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 29 अप्रैल 2026 की तारीख निर्धारित की है। यह निर्णय न केवल जबलपुर, बल्कि पूरे राज्य के उन निजी स्कूलों के लिए एक सख्त चेतावनी है जो समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के नियमों की अनदेखी करते हैं।

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