नोएडा में चल रहे श्रमिक आंदोलन को देखते हुए जिला प्रशासन ने आउटसोर्सिंग एजेंसियों के खिलाफ सख्त रूख अपनाया है।
नोएडा। नोएडा में चल रहे श्रमिक आंदोलन को देखते हुए जिला प्रशासन ने आउटसोर्सिंग एजेंसियों के खिलाफ सख्त रूख अपनाया है। जिला प्रशासन ने सभी आउटसोर्सिंग एजेंसियों और संविदाकारों शासन की गाइडलाइंस का शत-प्रतिशत पालन करने तथा सभी वर्गों में कार्यरत श्रमिकों का न्यूनतम वेतन एक अप्रैल से हर हाल में लागू करने के निर्देश दिए है।
हाई लेवल कमेटी के साथ अहम बैठक
मुख्यमंत्री द्वारा श्रमिक आंदोलन की समस्याओं को सुलझाने के लिए गठित हाई लेवल कमेटी के साथ जिला प्रशासन ने बुधवार को कलक्ट्रेट में बैठक की। हाई लेवल कमेटी के सदस्यों ने सभी आउट सोर्सिंग व संविदाकार एजेंसियों को वेतन का भुगतान सीधे श्रमिकों के बैंक खाते में करने व "पे स्लिप" भी देने का आदेश दिया।
पंजीकरण में बड़ा अंतर, 1500 एजेंसियां सक्रिय
हाई लेवल बैठक में प्रशासन के समक्ष चौंकानेवाला खुलासा हुआ। बैठक में बताया गया कि श्रम विभाग के डाटा के अनुसार जिले में महज 600 आउटसोर्सिंग एजेंसियां ही पंजीकृत हैं, जबकि अनधिकृत सूत्रों के मुताबिक जिले में करीब 1500 से अधिक एजेंसियां सक्रिय रूप से काम कर रही हैं। अधिकांश एजेंसियां पंजीकरण के बिना संचालित हो रही हैं, जो कानूनी प्राविधानों का उल्लंघन है।
डीएम की नाराजगी, एजेंसियों की भूमिका पर संदेह
यह जानकारी सामने आने के बाद हाई लेवल कमेटी और बैठक में मौजूद डीएम ने सभी पंजीकृत और अपंजीकृत आउटसोर्सिंग एजेंसियों और संविदाकारों को शासन की गाइडलाइंस का शत-प्रतिशत पालन करने के निर्देश दिये। डीएम ने बैठक में इस बात पर नाराजगी व्यक्त की कि श्रमिकों के उपद्रव के दौरान कई मौकों पर समझौते के लिए बुलाए जाने पर भी एजेंसियों के प्रतिनिधि नहीं पहुंचे। उन्होंने स्पष्ट किया कि एजेंसी संचालकों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है और इसकी जांच की जा रही है।
न्यूनतम वेतन लागू करना अनिवार्य
बैठक में सभी एजेंसियों को बताया गया कि सरकार ने सभी श्रेणियों के श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन निर्धारित कर दिया है। इसे एक अप्रैल से हर हाल में लागू करना है। डीएम ने कहा कि जिले में आउटसोर्सिंग एजेंसियों की जिम्मेदारी तय कर दी गई है और लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
उपद्रव पर ब्लैकलिस्ट और लाइसेंस रद्द की चेतावनी
गौतमबुद्ध नगर की डीएम मेधा रूपम ने भी आउटसोर्सिंग एजेंसियों को सख्त चेतावनी दी है कि यदि उनके द्वारा भर्ती किए गए श्रमिकों द्वारा कोई उपद्रव, हिंसा या अनुशासनहीनता की घटना हुई तो संबंधित एजेंसी को ब्लैकलिस्ट कर दिया जाएगा और उनका लाइसेंस निरस्त कर दिया जाएगा। वेतन में कोई लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
नोटिस जारी, अपंजीकृत एजेंसियों पर नजर
बुधवार को हाई पावर कमेटी ने भी कलक्ट्रेट में बैठक कर कुछ एजेंसियों को नोटिस जारी किया है। अपंजीकृत एजेंसियों पर भी नजर रखी जा रही है।
वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में बैठक
प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा गठित हाई लेवल कमेटी की बैठक में अपर मुख्य सचिव लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग आलोक कुमार, प्रमुख सचिव श्रम एवं सेवायोजन विभाग उत्तर प्रदेश एमकेएस सुंदरम, श्रम आयुक्त उत्तर प्रदेश कानपुर मार्कंडेय शाही ने भाग लिया।
श्रमिकों को अनुशासन और प्रशिक्षण पर जोर
कमेटी ने एजेंसियों से कहा कि श्रमिकों को अनुशासित रखें और उन्हें प्रशिक्षित करें, ताकि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या अशांति की स्थिति उत्पन्न न हो।
बैंक भुगतान, पुलिस सत्यापन और हेल्पलाइन जारी
कमेटी ने निर्देश दिया कि श्रमिकों का वेतन सीधे बैंक खातों में हस्तांतरित करें। बाउंचर या अन्य माध्यम से भुगतान न दें। श्रम आयुक्त ने कहा कि सभी कर्मकारों का ज्वाइनिंग के समय पुलिस सत्यापन कराएं और उन्हें भविष्य निधि व कर्मचारी राज्य बीमा में पंजीकृत करें। मदद के लिए हेल्पलाइन नंबर 9411900251 भी जारी किया गया है।
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