इंदौर। शहर में पुलिस की बड़ी लापरवाही सामने उजागर हुई है। यहाँ पुलिस एक धोखाधड़ी के मामले में FIR दर्ज करने के बाद, कोर्ट में आरोप पत्र पेश करना ही भूल गई।
इंदौर। शहर में पुलिस की बड़ी लापरवाही सामने उजागर हुई है। यहाँ पुलिस एक धोखाधड़ी के मामले में FIR दर्ज करने के बाद, कोर्ट में आरोप पत्र पेश करना ही भूल गई। पुलिस की कुंभकर्णी नींद तब खुली जब हाई कोर्ट ने मामले में नोटिस जारी कर जवाब तलब किया। कानूनी प्रक्रिया सबसे महत्वपूर्ण कदम है।
4 साल से धूल फांक रही फाइल
पिछले 4 सालों से पुलिस मामले की फाइल दबाकर बैठी रही और कोई कार्रवाई नहीं की। शिकायतकर्ता ने 4 साल तक सिस्टम से लंबी जंग लड़ी, जिसके बाद अब उसे न्याय की कुछ उम्मीद जगी है।
यह है पूरा मामला
यह मामला धोखाधड़ी (Fraud) से जुड़ा है। फरियादी ने करीब 4 साल पहले इंदौर पुलिस में इसकी शिकायत दर्ज कराई थी। पुलिस ने शिकायत की गंभीरता को देखते हुए FIR तो दर्ज कर ली, लेकिन उसके बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया। नियमानुसार, FIR के बाद पुलिस को जांच पूरी कर एक निश्चित समय सीमा के भीतर कोर्ट में चालान (Chargesheet) पेश करना होता है, ताकि न्यायिक कार्यवाही शुरू हो सके।
हालांकि, इंदौर पुलिस के अधिकारियों और जांच अधिकारी ने इस मामले में कोई रुचि नहीं दिखाई। मजबूर होकर पीड़ित को न्याय के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
हाई कोर्ट ने की सख्ती, तब फिर खुली फाइल
जब यह मामला हाई कोर्ट पहुँचा, तो कोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ा ऐतराज जताया। कोर्ट ने पूछा कि आखिर 4 साल बीत जाने के बाद भी चालान पेश क्यों नहीं किया गया? हाई कोर्ट द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बाद प्रशासन और पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया। अब जाकर पुलिस विभाग ने अपनी गलती मानी है और मामले की फाइल फिर से खोली गई है। इस घटना ने पुलिस की कार्यक्षमता और न्याय दिलाने की उनकी प्रतिबद्धता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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