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मप्र सहकारी समितियों में राजनेताओं की नियुक्ति

नितिगत निर्णय, मप्र के सहकारी समितियों में अब राजनीतिज्ञों की होगी नियुक्ति

भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने सहकारी आंदोलन को नई दिशा देने और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को सशक्त बनाने के लिए एक बड़ा नीतिगत निर्णय लिया है।

नितिगत निर्णय मप्र के सहकारी समितियों में अब राजनीतिज्ञों की होगी नियुक्ति

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भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने सहकारी आंदोलन को नई दिशा देने और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को सशक्त बनाने के लिए एक बड़ा नीतिगत निर्णय लिया है। राज्य की सहकारी समितियों को अब सरकारी अधिकारियों के नियंत्रण से मुक्त किया जाएगा और उनकी जगह राजनीतिक व्यक्तियों को प्रशासक के रूप में नियुक्त किया जाएगा।

​कार्यकर्ता को मिलेगी अहम जिम्मेदारी

​इस निर्णय के माध्यम से सत्ता में सक्रिय कार्यकर्ताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी जाएंगी, जिससे सरकार और सहकारी संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो सके। सहकारिता और मंडियों में अब सरकारी अधिकारियों के स्थान पर सरकार द्वारा नामित राजनीतिक व्यक्ति प्रशासक का पद संभालेंगे। इन नए नियुक्त प्रशासकों के पास संस्था की सदस्यता सूची तैयार करने और आगामी चुनावों के संचालन की पूरी कमान होगी।

किसानों के लिए कई योजनाएं

​मध्य प्रदेश में वर्तमान में 'कृषक कल्याण वर्ष' मनाया जा रहा है, जिसके तहत किसानों के हित में कई नई योजनाएं और सुधार लागू किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में, सहकारी संस्थाओं के लोकतांत्रिक स्वरूप को बहाल करने के लिए चुनाव कराने की तैयारी तेज हो गई है।

​प्राशासक मंडल गठित करने की योजना

लंबे समय से इन समितियों का कार्यभार सरकारी अधिकारियों के पास था, जिससे स्थानीय स्तर पर राजनीतिक नेतृत्व और किसानों की सीधी भागीदारी सीमित हो गई थी। अब सरकार की योजना है कि सहकारी समितियों में प्रशासक मंडल गठित किए जाएं।

​अनुभवी कार्यकर्ता को मिलेगी जगह

इन मंडलों में भाजपा या सत्ताधारी दल के अनुभवी कार्यकर्ताओं को जगह दी जाए। ये प्रशासक न केवल संस्था का दैनिक कामकाज देखेंगे, बल्कि निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए सदस्यता सूची को भी दुरुस्त करेंगे।

समिति के माध्यम से किसानों तक होगी पहुंच

​इस कदम को मध्य प्रदेश की राजनीति में कार्यकर्ताओं को "एडजस्ट" करने और सहकारी ढांचे पर राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है। इससे समितियों के माध्यम से किसानों तक पहुंच बनाना सरकार के लिए और आसान हो जाएगा।

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