नई दिल्ली। रेयर अर्थ मैटेरियल यानी स्थायी चुंबक को लेकर भारत की चीन या अन्य देशों पर निर्भरता खत्म हो सकती है। देश में इसी साल से रेयर अर्थ मैटेरियल यानी स्थायी चुंबक का उत्पादन शुरू हो जाएगा।
नई दिल्ली। रेयर अर्थ मैटेरियल यानी स्थायी चुंबक (आरईपीएम) को लेकर भारत की चीन या अन्य देशों पर निर्भरता खत्म हो सकती है। देश में इसी साल से रेयर अर्थ मैटेरियल यानी स्थायी चुंबक (आरईपीएम) का उत्पादन शुरू हो जाएगा। केन्द्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी किशन रेड्डी ने यह जानकारी दी। केन्द्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी किशन रेड्डी दुर्लभ ने बृहस्पतिवार को फिक्की और खनन मंत्रालय की ओर से आयोजित सम्मेलन में कहा, सरकार आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत सरकार रेयर अर्थ मैटेरियल के आयात पर निर्भरता कम करने के लिए ठोस कदम उठा रही है। इस क्रम में इसी साल भारत में स्थायी चुंबकों का उत्पादन शुरू हो जाएगा। इस पहल से इलेक्ट्रिक वाहनों, पवन चक्कियों और रक्षा क्षेत्रों में चीन पर दशकों पुरानी निर्भरता खत्म होगी और आत्मनिर्भरता आएगी। सरकार ने 7,280 करोड़ रुपये के निवेश के साथ सालाना 6,000 मीट्रिक टन आरईपीएम उत्पादन का लक्ष्य रखा है।
भारत ने 73 अरब का रेयर अर्थ प्रोजेक्ट मंजूर किया
सरकार ने 73 अरब रुपये के रेयर अर्थ चुंबक उत्पादन कार्यक्रम को मंजूरी दी है। रेयर अर्थ मैटेरियल यानी परमानेंट मैग्नेट (REPM) ई-वाहनों एवं नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों के लिए जरूरी महत्वपूर्ण खनिजों के मामले में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक अहम कदम होगा। यह योजना भारत को चीन से मैग्नेट आयात करने की आवश्यकता को कम करेगी। यह परियोजना 2026 के अंत तक पूरी तरह से परिचालन में आने की उम्मीद है। चीन वर्तमान में 90% से अधिक रेयर अर्थ मैग्नेट के प्रसंस्करण को नियंत्रित करता है। इस घरेलू उत्पादन के शुरू होने से, भारत के ऑटोमोबाइल और रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में सप्लाई चैन की रुकावट कम हो जाएगी।
भारत करेगा REPM उत्पादन शुरू
मालूम हो कि भारत के पास 6.9 मिलियन टन के साथ दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा रेयर अर्थ भंडार मौजूद है, लेकिन अब तक यह कच्चे माल के रूप में चीन पर ही निर्भर था। इस परियोजना के पूर्ण होने पर ऑक्साइड से मेटल और फिर मैग्नेट बनाने की पूरी प्रक्रिया देश में ही होगी, जिससे आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत किया जा सकेगा। ये चुंबक इलेक्ट्रिक वाहन (EV), स्मार्टफोन, रक्षा उपकरण (रडार, मिसाइल) के लिए महत्वपूर्ण हैं, जिन्हें "आधुनिक युग का नया तेल" कहा जाता है। यह घोषणा ऐसे समय में हुई है, जब भारत नियोडिमियम और प्रासियोडिमियम जैसे रेअर अर्थ तत्वों की आपूर्ति सुनिश्चित करने पर ध्यान दे रहा है। मंत्री ने कहा, गुजरात सरकार ने इस दिशा में कार्य शुरू कर दिया है। आंध्र प्रदेश भी आगे बढ़ने को तैयार है। वह ओडिशा और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्रियों से भी इन संयंत्रों की स्थापना पर जल्द चर्चा करेंगे।
यह भी पढ़े: चंद्रशेखरन को तीसरा कार्यकाल विस्तार
https://www.primenewsnetwork.in/state/chandrasekaran-gets-third-term-extension/144614