Madhya Pradesh : भोपाल। मध्य प्रदेश के राजनीतिक औऱ प्रशासनिक गलियारों में मंत्रिमंडल विस्तार की सुगबुगाहट शुरू हो गई है। मंत्री व विधायकों का रिपोर्ट कार्ड तैयार हो रहा है..
Madhya Pradesh : भोपाल। मध्य प्रदेश के राजनीतिक औऱ प्रशासनिक गलियारों में मंत्रिमंडल विस्तार की सुगबुगाहट शुरू हो गई है। मंत्री व विधायकों का रिपोर्ट कार्ड तैयार हो रहा है। सूत्रों के हवाले से मुख्यमंत्री ने परफार्मेंस की रिपोर्ट केंद्रीय नेतृत्व को भेजा है। सूत्र बताते हैं कि मध्य प्रदेश में यदि गुजरात माडल लागू होता है तो वरिष्ठ विधायक फिर से मंत्री बन सकते हैं। वरिष्ठ नेताओं को भी मंत्रिमंडल में लिया जा सकता है।
मालूम हो कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि बिहार चुनाव के बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष की नियुक्ति होगी। मध्यप्रदेश की नई टीम में वरिष्ठ नेता शामिल हो सकते हैं। मंत्री का काम इस आधार पर देखा जाएगा कि वे प्रत्येक महीने में अपने प्रभार वाले जिलों का दौरा कर रहे हैं या नहीं और साथ ही विकास कार्यों की समीक्षा करते हैं या नहीं। वे अपने प्रभार वाले जिलों के कितने गांवों में रात्रि विश्राम करते हैं और रात्री चौपाल लगाकर जनता से सीधा संवाद किया कि नहीं। इसके साथ-साथ पार्टी संगठन के कार्यक्रमों और बैठकों में उनकी सहभागिता कैसी है। वे सरकार और संगठन के बीच सेतु का काम कर रहे हैं या नहीं। इसके साथ केंद्र सरकार के अभियानों को सफल बनाने में उनका योगदान कैसा रहा?
इसी तरह विधायकों के काम को भी जांचा जा रहा है। विधायकों को चार साल का रोडमैप बनाने के लिए कहा गया है। इसके साथ ही विधायक निधि का जनकल्याण और क्षेत्र के विकास में कितना उपयोग किया गया, इसकी विस्तार से रिपोर्ट तैयार कराई गई है। इसे मुख्यमंत्री को सौंपा जाएगा। इधर, भाजपा के सूत्र बताते हैं कि गोपाल भार्गव, बृजेंद्र प्रताप सिंह को मौका मिल सकता है। इन्हें जातीय समीकरण को देखते हुए मंत्री बनने का मौका नहीं मिला था।
गोपाल भार्गव रहली विधानसभा क्षेत्र से 9 वार जीते। वे 45 साल से राजनीति में सक्रिय हैं। वे उमा भारती, गौर और शिवराज मंत्रिमंडल में रहे हैं। 2018 में जब 15 महीने के लिए कांग्रेस की सरकार बनी थी तब उनकी वरिष्ठता के मद्देनजर उन्हें नेता विपक्ष बनाया गया था। इसके साथ 2020 में भी शिवराज सरकार में शपथ लेने वाले पांच मंत्रियों में वे शामिल थे, लेकिन उसके बाद मंत्रिमंडल विस्तार में उन्हें शामिल नहीं किया गया। अब उनकी वापसी के संकेत मिल रहे हैं। गोपाल भार्गव 73 साल के हैं। रहली विधानसभा का प्रतिनिधित्व करते हैं।
1985 में विधायक बने और यह क्रम बदस्तूर जारी
वे पोस्ट ग्रेजुएट हैं। पहली बार 1985 में विधायक बने औऱ यह क्रम बदस्तूर जारी है और 2023 में नौवीं बार विधायक बने। इसके साथ बृजेंद्र प्रताप सिंह संघ औऱ संगठन की पसंद हैं। 60 वर्षीय बृजेंद्र प्रताप सिंह पोस्ट ग्रेजुएट हैं। पहली बार 2003 में चुनाव लड़े थे औऱ चौथी बार 2023 में चुनाव लड़ कर विधायक बने हैं।
उधर, कांग्रेस से नाता तोड़कर भाजपा में शामिल हुए अमरवाड़ा विधायक कमलेश को कैबिनेट विस्तार में मौका मिल सकता है। वे 53 साल के हैं औऱ 11 वीं उत्तीर्ण हैं। पहली बार 2013 में विधायक बने और तीसरी बार 2023 में विधायक बने हैं।
मंत्रिमंडल विस्तार में दो महिलाओं को मौका मिल सकता है। इसमें इंदौर की पूर्व मेयर और चार बार की विधायक मालिनी गौड़ औऱ सीधी विधायक रीति पाठक शामिल हैं। मालिनी गौड़ चार बार विधायक रहीं हैं और रीति पाठक दो बार सांसद रहीं हैं। राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं कि कैबिनेट बनने के समय ओबीसी का ध्यान ऱखा गया था, इसीलिए इस वर्ग से 12 मंत्री बनाए गये थे। 9 मंत्री अभी सवर्ण हैं। अभी अनुसूचित जाति के 5 और अनुसूचित जनजाति के 5 विधायकों को मंत्री बनाया गया है।
अब पार्टी का ध्यान शासन और 2028 के विधान सभा चुनाव पर है। इसलिए जातीय समीकरणों तय होना लाजमी है। जातीय समीकरण के हिसाब से छह विधायकों को मंत्री बनाया गया है। इसमें नारायण सिंह, लखन पटेल, धर्मेंद्र सिंह लोधी, नारायण सिंह कुशवाहा, दिलीप अहिरवार, प्रतिमा बागरी शामिल हैं। आदिवासी समुदाय से पांच विधायक को मंत्री बनाया गया है। इसमें कुंअर बिजय शाह, संपतिया उइके, नागर सिंह चौहान, निर्मला भूरिया औऱ राधा रविंद्र सिंह शामिल हैं। मंत्रीमंडल में जातिगत समीकरण में मुख्यमंत्री समेत 12 ओबीसी मंत्री है। इसके अलावा 9 सवर्ण हैं, 5 एससी और 5 एसटी हैं।
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