भोपाल। मध्य प्रदेश: प्रदेश में गर्मी के तीखे तेवरों के बीच जल संकट ने हाहाकार मचाना शुरू कर दिया है...
मध्य प्रदेश में गहराता भीषण जल संकट, इंदौर और भोपाल जैसे महानगरों में स्थिति भी बदतर |
भोपाल। प्रदेश में गर्मी के तीखे तेवरों के बीच जल संकट ने हाहाकार मचाना शुरू कर दिया है। ग्रामीण इलाकों से लेकर प्रदेश के बड़े-बड़े महानगर तक बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। स्थिति यह हो चुकी है कि कुएं और जलस्रोत पूरी तरह सूख चुके हैं, जिससे लोगों को अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ रही है।
प्रदेश में महानगरों का हाल बुरा, पेय जल की किल्लत
इंदौर और भोपाल जैसे बड़े और विकसित शहरों में भी पानी की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। यहां के कई इलाकों में जलस्तर गिरने से हाहाकार मचा है। ग्वालियर अंचल में मई की शुरुआत से ही जल संकट ने अपने पैर पसारने शुरू कर दिए हैं। पेयजल की किल्लत की वजह से स्थानीय प्रशासन और आम जनता दोनों की चिंताएं बढ़ गई हैं।
कुछ जिलों में है डरावनी तस्वीर
सीहोर, बैतूल, रायसेन और सतना जिलों से आ रही पानी की किल्लत की तस्वीरें बेहद डरावनी और विचलित करने वाली हैं, जो प्रशासन के दावों की पोल खोलती हैं।
ग्रामीण अंचल में बूंद-बूंद पानी को मोहताज लोग
प्रदेश के ग्रामीण अंचलों में स्थिति और भी बदतर है। सूखे कुओं की तलहटी में बचे कुछ लीटर मटमैले पानी को निकालने के लिए महिलाएं और बच्चे अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं। भीषण धूप और लू के थपेड़ों के बीच ग्रामीण कई किलोमीटर का सफर तय कर पानी का इंतजाम करने को मजबूर हैं।
जल स्तर गिर रहा, जवाब दे रहे नल व हैंडपंप
जल स्तर (Groundwater level) में लगातार आ रही गिरावट के कारण नलकूप और हैंडपंप भी जवाब दे चुके हैं। यदि समय रहते प्रशासन द्वारा टैंकरों के माध्यम से या अन्य वैकल्पिक व्यवस्थाओं से जलापूर्ति नहीं की गई, तो आने वाले दिनों में यह संकट और भी उग्र रूप धारण कर सकता है।
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