सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के कालियाचक में तीन महिला समेत सात न्यायिक अधिकारियों पर हुए हमले की घटना पर घोर नाराजगी जताई है।
कोलकाता। सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के कालियाचक में तीन महिला समेत सात न्यायिक अधिकारियों पर हुए हमले की घटना पर घोर नाराजगी जताई है। हाई कोर्ट और चुनाव अयोग को घटना के मद्देनजर कड़ा कदम उठाने को कहा है। उसने चुनाव आयोग को घटना की जांच किसी भी केंद्रीय एजेंसी सीबीआर्ई या एनआईए से कराने के लिए कहा है। उसने राज्य के मुख्य सचिव, गृह सचिव, पुलिस महानिदेशक को रिपोर्ट देने को कहा है।
जिला प्रशासन को कारण बताओ नोटिस जारी
जिले के शीर्ष अधिकारयों डीएम, एसपी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक अधिकारियो की सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था करने का निर्देश दिया है जिससे वे अपना काम सुचारू रुप से कर सके। सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल की कानून व्यवस्था की स्थिति पर चिंता जताई है। कोर्ट ने कहा कि उसे मालूम है कि इस घटना के पीछे कौन है और किस लिए हुई है।
मालदा में न्यायिक अधिकारियों का 13 घंटे तक घेराव
गौरतलब है कि राज्य के विभिन्न हिस्सों में वे लोग विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं जिनका नाम वोटर लिस्ट से कट गया है। उनमें वे विचाराधीन वोटर भी हैं जिनका नाम कट गया है। मालदा जिले में भी कालियाचक समेत कई जगहों में लोगों का विरोध प्रदर्शन हो रहा है। कालियाचक में बुधवार शाम से रात तक विरोध प्रदर्शन कर रहे लोगों ने सात न्यायिक अधिकारियों का 13 घंटे तक घेराव कर दिया। न्यायिक अधिकारियों में तीन महिला अधिकारी भी थीं। उनकों छुड़ाने के लिए राज्य पुलिस और केंद्रीय बल के पहुंचने पर लोग उत्तेजित हो गए और न्यायिक अधिकारियों के वाहनों में तोड़डफोड़ की गई। रास्ते में बांस रखकर वाहनों को रोका गया। किसी तरह बचकर न्यायिक अधिकारी सुरक्षित जगह पहुंचे। अधिकारियों को बचाने के लिए हाई कोर्ट को हस्तक्षेप करना पड़ा।
सुप्रीम कोर्ट ने समय पर प्रशासनिक कार्रवाई न होने पर जताई नाराजगी
सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर नाराजगी जताई है कि अधिकारियों को संपर्क करना क्यों मुश्किल हुआ। समय पर प्रशासन और पुलिस ने क्यों नहीं कदम उठाया। न्यायिक अधिकारियों के लिए पहले से क्यों नहीं सुरक्षा की व्यवस्था की गई थी। सुप्रीम कोर्ट इस मामले की सुनवाई 6 अप्रैल को करेगा। सुनवाई के दिन राज्य के अधिकारियों को वीडियों कांफ्रेंसिंग के जरिए मौजूद रहने का निर्देश दिया गया है।
विरोध प्रदर्शन अन्य जिलों में भी तेज
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि न्यायिक अधिकारी दिन रात मेहनत कर रहे है जिससे उन पर सौंपा गया काम पूरा हो सके। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर कलकत्ता हाई कोर्ट के अधीन वे विचाराधीन वोटरों के कागजातों की जांच पड़ताल कर रहे है। उनकी और उनके परिवार की सुरक्षा की पूरी व्यवस्था हो। कालियाचक की घटना के बाद भी सुबह से मालदा जिले के सूजापुर समेत कई स्थानों और मालदा से सटे जिले मुर्शिदाबाद समेत विभिन्न जिलों के विभिन्न जगहो में नाम कटे वोटरों के विरोध का सिलसिला तेज हो गया है। उनकी वोट देने का अधिकार देने की मुख्य मांग है।
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