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इंदौर में ‘टूरिज़्म सखी’ महिलाओं के आजीविका...

इंदौर में ‘टूरिज़्म सखी’ महिलाओं के आजीविका कौशल को दे रही नई दिशा

शहर के खजराना, लाल बाग और पीतृ पर्वत की गलियों में हर दोपहर महिलाएं सामुदायिक स्थानों पर एकत्र होती हैं और जूट के धागों से बैग, पायदान और होम डेकोर की वस्तुएं बनाती हैं।

इंदौर में ‘टूरिज़्म सखी’ महिलाओं के आजीविका कौशल को दे रही नई दिशा

Tourism Sakhi is giving a new direction to livelihood skills of women In Indore |

इंदौर। शहर के खजराना, लाल बाग और पीतृ पर्वत की गलियों में हर दोपहर महिलाएं सामुदायिक स्थानों पर एकत्र होती हैं और जूट के धागों से बैग, पायदान और होम डेकोर की वस्तुएं बनाती हैं। उनके काम की लयबद्ध आवाज़ इंदौर में हो रहे एक व्यापक बदलाव को दर्शाती है, जहां महिलाएं ‘टूरिज़्म सखी’ पहल के विस्तार के साथ पर्यटन, सुरक्षा और उद्यमिता के क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड की महिलाओं के लिए सुरक्षित पर्यटन स्थल परियोजना के तहत, जिसे राज्य भर में एनजीओ भागीदारों के साथ लागू किया जा रहा है, शहर में महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है। इन्हें पर्यटक सुविधा प्रदाता के रूप में और जूट हस्तशिल्प जैसे आजीविका कौशल में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। हाल ही में इंदौर में 35 से अधिक महिलाओं ने जूट शिल्प का प्रशिक्षण पूरा किया।

500 से अधिक महिलाओं को प्रशिक्षण

इंदौर, चोरल, ओंकारेश्वर और पातालपानी सर्किट में सुरक्षा, पर्यटक सहायता, कला एवं शिल्प, खाना पकाने और ड्राइविंग जैसे क्षेत्रों में 500 से अधिक महिलाओं को प्रशिक्षित किया गया है। पूरे राज्य में अब तक इस कार्यक्रम के तहत लगभग 9,500 महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इस क्षेत्र में कार्य कर रही साझेदार संस्थाओं में से एक अपराजिता महिला संघ है।

योजना में महिलाओं के लिए विभिन्न काम

ओंकारेश्वर में इस योजना से जुड़ी महिलाएं अब गार्ड के रूप में काम कर रही हैं, पर्यटकों की सहायता कर रही हैं, नाव संचालन कर रही हैं और यहां तक कि आने वाले तीर्थयात्रियों के लिए आदि शंकराचार्य की प्रतिमाएं भी बना रही हैं। इस सकारात्मक प्रतिक्रिया से उत्साहित होकर, साझेदार समूहों ने शहर के और भी इलाकों में प्रशिक्षण का विस्तार किया है। जूट शिल्प में प्रशिक्षित महिलाएं अब स्थानीय मेलों में अपने उत्पाद प्रदर्शित कर रही हैं और कई को नियमित ऑर्डर भी मिल रहे हैं।

महिलाओं को प्रशिक्षण

परियोजना से जुड़ी रेखा रामजे ने कहा, “हर बैच में 35 से अधिक महिलाओं को प्रशिक्षण दिया गया है और उनमें से कई ने शिल्प कार्य से कमाई शुरू कर दी है।” पहले खाना पकाने का प्रशिक्षण लेने वाली कुछ महिलाओं ने अपने घरों से छोटे क्लाउड किचन भी शुरू कर दिए हैं। टूरिज़्म सखी कार्यक्रम के तहत महिलाओं को आतिथ्य, परिवहन, गाइडिंग, कला एवं शिल्प, खाना पकाने, बिक्री और सुरक्षा में प्रशिक्षण दिया जाता है। अपनी भूमिका के अनुसार वे प्रति माह 5,000 से 25,000 रुपये तक कमा रही हैं।

बदल दिया आत्मनिर्भता का पैमाना व बढ़ा आय

जूट शिल्प का प्रशिक्षण पूरा करने वाली कारीगर सपना वर्मा ने कहा कि इस कार्यक्रम ने उनके आत्मविश्वास और आय—दोनों को बदल दिया है। उन्होंने कहा, “पहले मेरे पास कौशल था, लेकिन दिशा नहीं थी। प्रशिक्षण के बाद मैंने घर से बैग और सजावटी वस्तुएं बनाना शुरू किया और अब मुझे प्रदर्शनियों और स्थानीय दुकानों से नियमित ऑर्डर मिलते हैं। पहली बार मुझे लगता है कि मेरे काम का मूल्य है और मैं अपनी कमाई से परिवार का सहयोग कर पा रही हूं।”

पर्यटन महिलाओं को दे रहा नया स्वरूप

मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि यह पहल राज्य में महिलाओं की पर्यटन से जुड़ने की भूमिका को नया स्वरूप दे रही है। उन्होंने कहा, “टूरिज़्म सखियां न केवल सुरक्षित पर्यटन स्थलों में योगदान दे रही हैं, बल्कि अपने परिवारों की आर्थिक सहयोगी भी बन रही हैं। इंदौर की भागीदारी दिखाती है कि यह मॉडल सुरक्षा और आजीविका—दोनों को मजबूत कर सकता है।”

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