प्राइम न्यूज़ – एक कसम, राष्ट्र प्रथम
Breaking News

जांच के लिए कमेटी का हुआ गठन

यूपी में उपभोक्ताओं के विरोध के बाद स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने पर लगी रोक

उत्तर प्रदेश में उपभोक्ताओं के भारी विरोध को देखते हुए पुराने बिजली मीटरों को स्मार्ट प्रीपेड मीटर से बदलने के काम पर यूपी पावर कॉरपोरेशन ने रोक लगा दी है।

यूपी में उपभोक्ताओं के विरोध के बाद स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने पर लगी रोक

UP Halts Smart Prepaid Meter Rollout Amid Consumer Protests |

लखनऊ (यूपी)। उत्तर प्रदेश में उपभोक्ताओं के भारी विरोध को देखते हुए पुराने बिजली मीटरों को स्मार्ट प्रीपेड मीटर से बदलने के काम पर यूपी पावर कॉरपोरेशन ने रोक लगा दी है। स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर आ रही शिकायतों और बवाल के बाद 
सीएम योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर बिजली मीटरों को बदलने का काम रोक दिया गया है।

गुणवत्ता और बिजली आपूर्ति पर सवाल

यूपी में कुछ दिनों से बिजली के पुराने मीटरों को बदला जा रहा है। इस अभियान के तहत राज्य में अब तक कुल 78 लाख स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं। इसमें 70.50 लाख स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए गए हैं। हालांकि, नये स्मार्ट मीटर की गुणवता तथा कनेक्टिविटी की समस्या और बिल भुगतान के बावजूद घंटों तक बिजली आपूर्ति नहीं होने को लेकर लगातार शिकायत मिल रही थीं।

जांच के लिए तकनीकी समिति का गठन

उपभोक्ताओं की बढ़ती शिकायतों और मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद इन मीटरों की जांच के लिए तकनीकी कमेटी का गठन किया गया है। स्मार्ट मीटर की गुणवता की जांच के लिए गठित चार सदस्यीय तकनीकी समिति में आईआईटी कानपुर के दो प्रोफेसर सहित वड़ोदरा के इलेक्ट्रिकल रिसर्च एवं डवलपमेंट एसोसिएशन के अनुभाग प्रमुख और पावर कॉरपोरेशन के निदेशक वितरण शामिल हैं। अब तकनीकी कमेटी की रिपोर्ट आने तक के लिए पुराने बिजली मीटरों को स्मार्ट से बदलने पर रोक लगा दी गयी है। हालांकि, नए बिजली कनेक्शन स्मार्ट प्रीपेड मीटर से ही दिए जाएंगे।

पूरे प्रदेश को प्रीपेड सिस्टम में लाने का लक्ष्य

केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय की रिवैंप डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम के तहत राज्य में बिजली उपभोक्ताओं के घरों में लगे मैन्युअल मीटरों को स्मार्ट मीटर से बदलने का काम चल रहा है। लगभग ₹27000 करोड़ खर्च कर पुराने मीटर को स्मार्ट मीटर से बदला जा रहा है। बदले जा रहे मीटरों का खर्च उपभोक्ताओं से नहीं लिया जा रहा। पावर कॉरपोरेशन का लक्ष्य पूरे प्रदेश को प्रीपेड सिस्टम पर लाने का है। फिलहाल तकनीकी बाधाओं और जनता के विरोध की वजह से यह काम रूक गया है।

बिना सहमति मीटर बदलने और खराब गुणवत्ता पर बढ़ा विवाद

केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय के आदेश के अनुसार मीटरों को उपभोक्ताओं की सहमति से ही प्रीपेड मीटर में बदला जाना था। इस दौरान बड़ी संख्या में शिकायतें मिलीं कि मीटर को बिना उपभोक्ताओं की सहमति के प्रीपेड में बदल दिया जा रहा था। साथ ही बीते कुछ दिनों से स्मार्ट मीटर की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे थे। कुछ स्थानों पर लोगों ने पावर हाउस का घेराव भी किया था।

सीएम के आदेश पर जांच तेज, रिपोर्ट तक प्रक्रिया पर रोक

सीएम योगी आदित्यनाथ तक शिकायत पहुंचने के बाद उन्होंने इसकी जांच करवाने के आदेश दिए थे। पावर कॉरपोरेशन ने 12 अप्रैल को इस मामले की जांच के लिए चार सदस्य विशेषज्ञ समिति गठित किया था। इसे 10 दिनों में रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है। पावर कार्पोरेशन के एमडी आशीष गोयल ने शनिवार रात विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट आने तक पुराने मीटरों को स्मार्ट मीटर से बदलने की प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। पावर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष ने साफ किया है कि उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा हमारी प्राथमिकता है।

यह भी पढ़ें: https://www.primenewsnetwork.in/india/rajnath-singhs-3-day-germany-visit-from-april-21/175617

21 अप्रैल से तीन दवसीय यात्रा पर जर्मनी जाएंगे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

Related to this topic: