उत्तर प्रदेश को केंद्रीय बजट 2026 से इस बार इनकम टैक्स से सबसे अधिक कमाई होगी। ऐसा राज्य में आयकर रिटर्न भरने वालों की संख्या में आयी बढ़ोत्तरी से यह संभव हो सकेगा।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश को केंद्रीय बजट 2026 से इस बार इनकम टैक्स से सबसे अधिक कमाई होगी। ऐसा राज्य में आयकर रिटर्न भरने वालों की संख्या में आयी बढ़ोत्तरी से यह संभव हो सकेगा। इससे उलट राज्य को सेंट्रल जीएसटी से मिलने वाली हिस्सेदारी में कमी आ सकती है।
यूपी को इनकम टैक्स से होगी सबसे ज्यादा कमाई
केंद्रीय करों में यूपी को मिलने वाले हिस्सेदारी में इस वित्तीय वर्ष में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। यूपी देश का सबसे बड़ा राज्य है। इस कारण सबसे अधिक उपभोक्ता आधार के कारण सामान्यतया राज्य को सेंट्रल जीएसटी से सबसे अधिक राजस्व मिलने की उम्मीद रहती है, लेकिन इस बार तस्वीर बदली हुई नजर आ रही है। आंकड़ों के मुताबिक यूपी को सबसे ज्यादा कमाई इनकम टैक्स से होगी, जो राज्य की बढ़ती आय, रोजगार और टैक्स बेस के विस्तार का संकेत है।
इनकम टैक्स के रूप में करीब 95698 करोड़ मिलने का अनुमान
वित्त वर्ष 2026-27 के लिए जारी राज्यवार वितरण तालिका के अनुसार यूपी को इनकम टैक्स के रूप में करीब 95698 करोड़ मिलने का अनुमान है। यह राज्य को मिलने वाली कुल केंद्रीय कर हिस्सेदारी का बड़ा हिस्सा है। विशेषज्ञों के मुताबिक इनकम टैक्स से बढ़ी कमाई का सीधा मतलब है कि राज्य में करदाताओं की संख्या बढ़ी है और लोगों की औसत आय में सुधार हुआ है। बीते कुछ वर्षों में औद्योगिक निवेश, स्टार्टअप गतिविधियों, एमएसएमई विस्तार और संगठित रोजगार में वृद्धि से टैक्स नेटवर्क मजबूत हुआ है। इसका असर अब केंद्र से मिलने वाली हिस्सेदारी में साफ दिख रहा है।
केंद्र से मिलने वाले करों में UP की शीर्ष आय का स्रोत नहीं रहेगा CGST
आयकर के बाद यूपी को कॉर्पोरेशन टैक्स से लगभग 78939 करोड़ रुपये और सेंट्रल जीएसटी से करीब 73546 करोड़ रुपये मिलने का अनुमान है। यानी केंद्र से मिलने वाले करों में सीजीएसटी यूपी की शीर्ष आय का स्रोत नहीं रहेगा। आंकड़ों पर नजर डालें तो यूपी को कस्टम ड्यूटी से 14347 करोड़ रुपये, यूनियन एक्साइज ड्यूटी से 6111 करोड़ रुपये और अन्य करों व शुल्कों से करीब 267 करोड़ रुपये मिलेंगे। सभी मदों को मिलाकर यूपी को केंद्र के करों में कुल 2.68 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की हिस्सेदारी मिलने का अनुमान है, जो देश में सबसे अधिक है।
CGST में कम हिस्सेदारी
सीजीएसटी में अपेक्षाकृत कम हिस्सेदारी का कारण यह माना जा रहा है कि यूपी भले ही बड़ा उपभोक्ता राज्य है, लेकिन उत्पादन आधारित राज्यों की तुलना में यहां इनपुट टैक्स क्रेडिट और निर्यात आधारित गतिविधियां कम हैं। इसी वजह से जीएसटी में यूपी की हिस्सेदारी इनकम टैक्स और कॉरपोरेशन टैक्स से पीछे रह गई।
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