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इसमें परिवार के सदस्यों की संपत्ति भी बतानी होगी

उत्तराखंड के कर्मचारियों को 15 तक देना होगा संपत्ति का ब्योरा

उत्तराखंड के सरकारी कर्मचारियों- अधिकारियों को अपनी सभी चल-अचल संपत्ति का ब्योरा 15 दिसंबर तक राज्य कार्मिक विभाग को सौंपना होगा।  इसमें परिवार के सदस्यों का ब्योरा भी शामिल होगा।

उत्तराखंड के कर्मचारियों को 15 तक देना होगा संपत्ति का ब्योरा

उत्तराखंड के कर्मचारियों को 15 तक देना होगा संपत्ति का ब्योरा 

 इसमें परिवार के सदस्यों की संपत्ति भी बतानी होगी

देहरादून। उत्तराखंड के सरकारी कर्मचारियों- अधिकारियों को अपनी सभी चल-अचल संपत्ति का ब्योरा 15 दिसंबर तक राज्य कार्मिक विभाग को सौंपना होगा।  इसमें परिवार के सदस्यों का ब्योरा भी शामिल होगा। 
कार्मिक सचिव शैलेश बगोली ने सभी विभागों के प्रमुखों, सचिवों और उनके अधिनस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों से कहा है कि तय तिथि तक संपत्ति का ब्योरा दाखिल कर दें। 
यह निर्देश हाईकोर्ट की ओर से राज्य सरकार को दिए उस आदेश पर जारी किया गया है कि सभी कर्मचारी नौकरी ज्वाइन करने के समय और मौजूदा समय की संपत्ति का ब्योरा प्रस्तुत करें। 
मुख्य न्यायाधीश जी नरेंदर एवं न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने स्पष्ट कहा है कि नियमों के तहत संपत्ति की जानकारी छुपाने पर सख्ती से जवाबदेही तय करें। कोर्ट ने मुख्य सचिव और आयकर विभाग को विस्तृत कार्ययोजना के साथ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। 
मामला जल निगम के कुछ अधिकारियों की आय से अधिक संपत्ति की जांच से जुड़ा है। मामले में अनिल चंद्र बलूनी, जाहिद अली ने जनहित याचिकाएं दायर की हैं। जबकि, अखिलेश बहुगुणा और सुजीत कुमार विकास ने आरोपों को गलत बताते हुए हाईकोर्ट में चुनौती दी है। इन चारों मामलों की एक साथ सुनवाई हो रही है।
आठ दिसंबर को दो जनहित याचिकाओं की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने उत्तराखंड सरकारी सेवक आचरण नियमावली- 2002 का हवाला देते हुए कहा कि ‘परिवार के सदस्य’ में पत्नी, पुत्र, सौतेला पुत्र, अविवाहित पुत्री, सौतेली अविवाहित पुत्री, आश्रित पति/पत्नी एवं रक्त या विवाह संबंध से आश्रित अन्य सदस्य शामिल हैं। कोर्ट ने टिप्पणी की कि कई मामलों में सरकारी कर्मचारी यह कहकर परिजनों की संपत्ति का खुलासा नहीं करते कि वे आर्थिक रूप से स्वतंत्र हैं, जबकि नियम ऐसी छूट नहीं देते। इस आधार पर कोर्ट ने शासन से कहा कि निगम एवं अन्य सेवाओं के नियम भी इन्हीं मानकों के अनुरूप पारदर्शी बनाए जाएं।

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