मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र में हाथियों की बढ़ती आवाजाही से गांवों में दहशत का माहौल है।
सीधी/मउगंज/रीवा। मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र में हाथियों की बढ़ती आवाजाही से गांवों में दहशत का माहौल है। हाथियों के झुंड कई गांवों में घरों को नुकसान पहुंचा रहे हैं, अनाज के भंडार नष्ट कर रहे हैं और खेतों में खड़ी फसलों को रौंद रहे हैं। कई स्थानों पर डर इतना बढ़ गया है कि पूरे के पूरा गांव खाली हो गया है और ग्रामीण अपने घर छोड़ने को मजबूर हो गए हैं।
हाथियों का झुंड गांव में
पिछले दो सप्ताह से हाथियों का एक झुंड लगातार सीधी, मऊगंज और रीवा जिलों के चूहिया घाटी, गुढ़ और गोविंदगढ़ क्षेत्रों में जंगल और गांवों के बीच घूम रहा है। वन विभाग की टीमें स्थिति पर नजर रखे हुए हैं, लेकिन हाथियों की लगातार आवाजाही से ग्रामीण क्षेत्रों में गंभीर खतरा बना हुआ है।
हाथियों की गतिविधियों से सीधी जिले में सबसे ज्यादा नुकसान
जांच में सामने आया कि विंध्य क्षेत्र में हाथियों की गतिविधियों से सबसे अधिक नुकसान सीधी जिले में हुआ है। कई गांवों में हाथियों के झुंड रात के समय बस्तियों में घुस आए और बड़े पैमाने पर तबाही मचाई। हाथियों ने कच्चे मकानों की दीवारें और दरवाजे तोड़ दिए तथा घरों का सामान भी नुकसान पहुंचाया। घरों में रखा धान और अन्य अनाज या तो हाथियों ने खा लिया या जमीन पर बिखेर दिया। आसपास के खेतों में गेहूं और धान की फसलें भी रौंद दी गईं। रात में हाथियों के गांव में आने के डर से ग्रामीण अब पूरी रात जागकर अपने घरों और खेतों की निगरानी कर रहे हैं।
पड़खुरी गांव की पूरी बस्ती खाली
सीधी जिले के पड़खुरी गांव में हाथियों के डर से लोगों को पूरी बस्ती खाली करनी पड़ी है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें मजबूरी में अपने घर छोड़कर आसपास के सुरक्षित स्थानों में रहने वाले रिश्तेदारों के यहां जाना पड़ा। ग्रामीणों के अनुसार हाथियों का झुंड लगातार इलाके में घूम रहा है, जिससे जान-माल का खतरा बना हुआ है। रात होते ही डर और बढ़ जाता है क्योंकि हाथी अधिकतर रात में ही गांवों में प्रवेश करते हैं। कई परिवार बच्चों और बुजुर्गों के साथ अस्थायी रूप से अन्य स्थानों पर चले गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि हाथी रात में गांव में आते हैं और सुबह होते ही जंगल की ओर लौट जाते हैं।
मऊगंज जिले में भी ग्रामीणों की रात जागकर पहरेदारी
सीधी में तबाही मचाने के बाद हाथियों का झुंड अब मऊगंज जिले के कई गांवों की ओर बढ़ गया है। यहां भी कई घरों को नुकसान पहुंचाया गया है। घरों में रखा अनाज और खाद्य सामग्री नष्ट हो गई तथा खेतों की फसलें रौंद दी गईं।डर के कारण ग्रामीणों ने खुद को बचाने के लिए अनोखे तरीके अपनाए हैं। लोग पूरी रात जागकर ढोल-नगाड़े बजाते हैं और मशाल जलाकर हाथियों को भगाने की कोशिश करते हैं।इस बीच वन विभाग की टीमें लगातार हाथियों की गतिविधियों पर नजर रख रही हैं और ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दे रही हैं।
रीवा की चूहिया घाटी में दहशत और ट्रैफिक पर भी असर
हाथियों का झुंड रीवा जिले के चूहिया घाटी, गुढ़ और गोविंदगढ़ क्षेत्रों तक पहुंच गया है। हाथियों की मौजूदगी से सड़क यातायात भी प्रभावित हुआ। एक समय घाटी के पास जंगल में हाथियों के झुंड के डेरा डालने के कारण सुबह हाईवे पर वाहनों की आवाजाही रोकनी पड़ी। इससे कई घंटे तक ट्रैफिक बाधित रहा और यात्रियों को परेशानी हुई। सुरक्षा के लिए वन विभाग ने कुछ समय के लिए ट्रैफिक रोक दिया ताकि हाथी सुरक्षित रूप से जंगल की ओर लौट सकें।
रेडियो कॉलर वाला हाथी फिर सक्रिय
वन अधिकारियों के अनुसार एक रेडियो कॉलर लगाया गया नर हाथी फिर से सक्रिय हो गया है। यही हाथी पहले जैसिंहनगर क्षेत्र में तीन लोगों की जान ले चुका है। यह हाथी बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के जंगल से निकलकर पिछले लगभग 15 दिनों से लगातार घूम रहा है। रेडियो कॉलर के जरिए वन विभाग उसकी गतिविधियों पर नजर रख रहा है। जानकारी के अनुसार यह हाथी रोज लगभग 20-25 किलोमीटर की दूरी तय कर रहा है और कई बार गांवों के करीब पहुंच रहा है।
एहतियात के तौर पर बिजली आपूर्ति बंद
हाथियों की बढ़ती गतिविधि को देखते हुए वन विभाग ने कई सावधानी उपाय शुरू किए हैं। जब भी हाथी गांव के पास पहुंचते हैं, तो बिजली आपूर्ति अस्थायी रूप से बंद कर दी जाती है ताकि बिजली से कोई दुर्घटना न हो। ग्रामीणों को रात में घर के अंदर रहने और जंगल या खेतों में न जाने की सलाह दी गई है। गांवों में मुनादी कर लोगों को सतर्क किया जा रहा है। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार मध्य प्रदेश का सिंगरौली जिला और छत्तीसगढ़ का सरगुजा जिला घने जंगलों से जुड़े हुए हैं। इस कारण हाथी आसानी से दोनों राज्यों के बीच आवाजाही करते हैं। इस क्षेत्र को “छत्तीसगढ़-विंध्य हाथी कॉरिडोर” कहा जाता है।
हाथियों के दो प्रमुख रास्ते
पहला रास्ता-हाथी अक्सर छत्तीसगढ़ के सरगुजा और बलरामपुर जिलों से निकलते हैं। वहां से वाड्रफनगर के जंगलों से होते हुए सिंगरौली के देवसर और जियावन पहुंचते हैं। फिर सीधी होते हुए कई बार रीवा और शहडोल तक पहुंच जाते हैं। दूसरा रास्ता- उमरिया जिले के बांधवगढ़ के जंगलों से शुरू होता है। वहां से हाथी शहडोल, सीधी और रीवा की ओर बढ़ते हैं। एक क्षेत्र में 15-20 दिन तक रुकते हैं हाथी। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार हाथियों का झुंड सामान्यतः किसी क्षेत्र में 15-20 दिन तक रहता है। इसके बाद भोजन और पानी की उपलब्धता के अनुसार दूसरे जंगल की ओर बढ़ जाता है।
हाथियों की गतिविधि बढ़ने के कारण
विशेषज्ञों के अनुसार विंध्य क्षेत्र में हाथियों की बढ़ती आवाजाही के कई कारण हैं जिसमें जंगलों की कटाई, जंगलों में भोजन की कमी, नए हाथी कॉरिडोर का बनना, पर्यावरणीय बदलाव, छत्तीसगढ़-मध्य प्रदेश सीमा के जंगलों में वन्यजीवों की बढ़ती गतिविधि हैं। इन कारणों से विंध्य क्षेत्र धीरे-धीरे हाथियों का नया निवास क्षेत्र बनता जा रहा है।
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