यूपी में शिक्षा आयोग अध्यक्ष पद के नियम में बड़ा बदला
उत्तर प्रदेश में मौजूदा प्रमुख सचिव या उसके समकक्ष अफसर बन सकेंगे "शिक्षा सेवा चयन आयोग" के अध्यक्ष। अब तक की व्यवस्था के तहत इस पद पर भारतीय प्रशासनिक सेवा का सदस्य हो या रहा हो और राज्य सरकार में प्रमुख सचिव का पद या उसके समकक्ष पद धारण करने वाला व्यक्ति ही अध्यक्ष बन सकता था। योगी सरकार ने इस संबध में "कैबिनेट बाई सर्कुलेशन" द्वारा उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (संशोधन) अध्यादेश को स्वीकृति दे दी है। इसके साथ ही आयोग को जल्द ही नया अध्यक्ष मिलने का रास्ता साफ हो गया है। यह पद कुछ माह से रिक्त है।
उच्च शिक्षा विभाग की ओर से पूर्व में की गई व्यवस्था में कहा गया था कि अध्यक्ष पद पर भारतीय प्रशासनिक सेवा का सदस्य हो या रहा हो और राज्य सरकार में प्रमुख सचिव का पद या उसके समकक्ष पद धारण किया हो, उसका चयन होगा। अब इसमें संशोधन करते हुए कहा गया है कि राज्य सरकार में प्रमुख सचिव का पद या उसके समकक्ष पद पर हो या रहा हो, आयोग का अध्यक्ष बन सकेगा।
67 उम्मीदवारों ने किया आवेदन
उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (संशोधन) अध्यादेश कैबिनेट से स्वीकृत होने के बाद माना जा रहा है कि सरकार किसी प्रमुख सचिव को इसका अध्यक्ष बना सकती है। आयोग की पूर्व अध्यक्ष प्रो. कीर्ति पांडेय के इस्तीफे के बाद आयोग नए अध्यक्ष की तलाश कर रहा है। इसके लिए 21 अक्तूबर तक आवेदन लिए गए हैं। जानकारी के अनुसार इसके लिए 67 लोगों ने आवेदन किए हैं। इसमें शिक्षाविदों के साथ-साथ प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारियों ने भी आवेदन किया है।
यूपी के उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने इस संबंध में बताया कि उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (संशोधन) अध्यादेश, 2025 का प्रख्यापन कैबिनेट बाई सर्कुलेशन के माध्यम से स्वीकृत कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार द्वारा उच्च, माध्यमिक और बेसिक शिक्षा विभागों में सहायक आचार्य, टीईटी, टीजीटी, पीजीटी जैसी परीक्षाओं को पारदर्शी एवं शुचितापूर्ण ढंग से संचालित करने हेतु उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग अधिनियम, 2023 के तहत आयोग का गठन किया गया था। यह आयोग सभी स्तरों पर शिक्षा सेवा से जुड़ी भर्ती परीक्षाओं को एकीकृत, निष्पक्ष और तकनीकी रूप से सुदृढ़ प्रक्रिया के माध्यम से संपन्न कराने के लिए जिम्मेदार है। मंत्री उपाध्याय ने बताया कि आयोग की कार्य-संरचना और इसके बढ़ते दायरे को देखते हुए, अध्यक्ष पद पर नियुक्ति हेतु पात्रता का दायरा विस्तारित किया गया है। अधिनियम की धारा 4(2)(क) में संशोधन करते हुए पूर्व प्रावधान ‘भारतीय प्रशासनिक सेवा का सदस्य हो या रहा हो और राज्य सरकार में प्रमुख सचिव का पद या उसके समकक्ष पद धारण किया हो’ के स्थान पर अब ‘राज्य सरकार में प्रमुख सचिव का पद या उसके समकक्ष पद पर हो या रहा हो’ प्रतिस्थापित किया गया है। उन्होंने कहा कि योगी सरकार का उद्देश्य है कि आयोग का नेतृत्व ऐसे अनुभवी, सक्षम और प्रशासनिक दृष्टि से दक्ष व्यक्तित्व को मिले, जो आधुनिक सूचना प्रौद्योगिकी आधारित परीक्षा प्रणाली को अपनाकर पारदर्शी और समयबद्ध भर्ती सुनिश्चित कर सके।
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