प्रयागराज। उत्तर प्रदेश में अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों (एडेड विद्यालय) में प्रधानाचार्य बनने के लिए अब अभ्यर्थियों को अनिवार्य रूप से लिखित परीक्षा व साक्षात्कार देना होगा।
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश में अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों (एडेड विद्यालय) में प्रधानाचार्य बनने के लिए अब अभ्यर्थियों को अनिवार्य रूप से लिखित परीक्षा व साक्षात्कार देना होगा। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस संबध में एक मुकदमे की सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया है। कोर्ट ने 2023 के नए शिक्षा सेवा चयन आयोग अधिनियम के लागू होने के बाद पुराने नियमों के तहत मांगे गए सभी अधियाचन शून्य घोषित कर दिये हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रधानाध्यापक पद पर भर्तियों को लेकर दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों (एडेड विद्यालय) में प्रधानाचार्य बनने के लिए अभ्यर्थियों को लिखित परीक्षा व साक्षात्कार देना अनिवार्य बताया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि 2023 के नए शिक्षा सेवा चयन आयोग अधिनियम के लागू होने के बाद पुराने नियमों के तहत मांगे गए सभी अधियाचन शून्य माने जाएंगे। कोर्ट ने शासन और चयन आयोग को भर्ती प्रक्रिया अगले छह महीने के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए।
नए प्रधानाचार्य नियम उच्च न्यायालय द्वारा मान्य
इलाहाबाद उच्च न्यायालय के जज न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की एकल पीठ ने कई जिलों के याचियों की याचिका पर यह फैसला सुनाया है। याचियों ने कोर्ट में दलील दी कि वर्ष 2019-20 और 2021-22 में प्रधानाचार्यों के 884 और हेडमास्टरों के 729 पदों के लिए प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी। इसलिए इसे पुराने नियमों से ही पूरा किया जाना चाहिए। इस पर कोर्ट ने कहा कि कानून में बदलाव का उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना है। महज अधियाचन भेज देने से किसी भी उम्मीदवार को नियुक्ति का मौलिक अधिकार प्राप्त नहीं हो जाता। जब प्रक्रिया एक कदम भी आगे नहीं बढ़ी तो नई व्यवस्था को लागू करना पूरी तरह सांविधानिक है।
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