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रूस–चीन का 99% व्यापार अब युआन और रुबल में

रूस–चीन का 99% व्यापार अब युआन और रुबल में, डॉलर की वैश्विक बादशाहत को बड़ी चुनौती

रूस पर लगे युद्ध प्रतिबंध के कारण रूस और चीन अब अपना सारा कारोबार रुबल और युआन में कर रहे है। इस कारण अमेरिका की करेंसी डालर को बड़ा झटका लगा है।

रूस–चीन का 99 व्यापार अब युआन और रुबल में डॉलर की वैश्विक बादशाहत को बड़ी चुनौती

99.1% व्यापार लोकल करेंसी में

रूस और चीन की सरकारों से मिले आंकड़ों के मुताबिक दोनों देश अब 99.1% व्यापार अब लोकल करेंसी यानी रुबल और युआन में अमरीकी डॉलर के बिना कर रहे हैं।इसका बड़ा कारण है रूस पर लगे युद्ध प्रतिबंध और उसके लिए ग्लोबल पेमेंट सिस्टम के दरवाजों का बंद होना। 

मालूम हो कि अमेरिकी डालर के प्रभुत्व के खिलाफ" "ब्रिक्स समूह" के नौ देश हैं जिनमें भारत, रूस और चीन प्रमुख हैं, ने अपनी अलग करेंसी (मुद्रा) को चुनने या डालर के बजाय "यूरो" में व्यापार करने की मंशा जाहिर की थी। इस समूह में ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, संयुक्त अरब अमीरात और ईरान शामिल हैं। ब्रिक्स में शामिल होने के लिए मलेशिया और तुर्की जैसे देश भी सदस्यता के लिए आवेदन कर चुके हैं। 

ब्रिक्स में डॉलर के विकल्प की चर्चा

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने "ब्रिक्स समूह" की बैठक के बाद इस कदम की आलोचना की थी। ट्रंप ने कहा था कि अगर ब्रिक्स के देश दूसरी करेंसी का समर्थन करेंगे तो उन्हें इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी और 100 प्रतिशत टैरिफ का सामना करना पड़ेगा। बाद "ब्रिक्स समूह" ने अपनी अलग मुद्रा का विचार त्याग दिया था।
अमेरिका की धमकी की परवाह नहीं करते हुए रूस और चीन ने मिलकर एक समानांतर पेमेंट सिस्टम तैयार कर लिया है। इसका सीधा असर अमेरिकी डॉलर की बादशाहत पर पड़ रहा है और "डीडॉलराइजेशन" (डालर मुक्त व्यापार) की रफ्तार तेज हो गई है।

SWIFT बंद, बैंक ब्लैकलिस्ट

चीन अब युआन को दुनिया की ट्रेडिंग करेंसी बनाने की योजना पर काम कर रहा है। रूस को तेल का भुगतान युआन में हो रहा है। अफ्रीका-एशिया के कई देशों से व्यापार युआन में हो रहा है। रूस कुछ मिनरल्स रुबल में बेचता है। याद रहे कि रूस को युद्ध और प्रतिबंधों की वजह से  दुनिया के डॉलर सिस्टम से लगभग बाहर कर दिया गया है। SWIFT पेमेंट सिस्टम बंद-डॉलर में लेन-देन रोक दिया गया है और उसके कई बैंक ब्लैकलिस्ट कर दिए गए। ऐसे में रूस के पास कोई दूसरा रास्ता नहीं था। इन हालात के बीच चीन आगे आया और दोनों ने तय किया कि अब व्यापार अपनी ही करेंसी - युआन और रुबल में होगा। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक-99.1% ट्रेड अब डॉलर में नहीं, बल्कि लोकल करेंसी में हो रहा है। यानि डॉलर का रोल लगभग खत्म हो गया है।  रूस - चीन का यह कदम वैश्विक स्तर पर बड़ा बदलाव माना जा रहा है। दुनिया का ज्यादातर अंतर्राष्ट्रीय कारोबार कई दशकों से डॉलर में होता आ रहा है। लेकिन यदि रूस चीन जैसे बड़े देश डॉलर को छोड़ देते हैं तो डालर का अवमूल्यन होगा और इससे अमेरिका की आर्थिक ताकत घटना तय है। डॉलर की डिमांड कम होती है अमेरिका की राजनीतिक पकड़ भी कमजोर होगी। इसीलिए रूस–चीन का 99% ट्रेड डॉलर से बाहर जाना, अमेरिका के लिए रणनीतिक झटका है।

 

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