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पश्चिम एशिया तनाव के बीच केन्द्र ने दी उद्योगों...

पश्चिम एशिया तनाव के बीच केन्द्र ने दी उद्योगों को राहत

West Asia : पश्चिम एशिया में जारी तनाव को देखते हुए केंद्र सरकार ने विदेश से आयात होने वाले 40 पेट्रोकेमिकल...

पश्चिम एशिया तनाव के बीच केन्द्र ने दी उद्योगों को राहत

पश्चिम एशिया तनाव के बीच केन्द्र ने दी उद्योगों को राहत |

West Asia : पश्चिम एशिया में जारी तनाव को देखते हुए केंद्र सरकार ने विदेश से आयात होने वाले 40 पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट्स पर कस्टम ड्यूटी पूरी तरह खत्म करने का ऐलान किया है। सरकार ने यह कदम उद्योगों को बढ़ती लागत और महंगे कच्चे माल से राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है।

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का असर अब भारत की अर्थव्यवस्था और इंडस्ट्री पर दिखने लगा है। इसे देखते हुए केन्द्र सरकार ने विदेश से आयात होने वाले 40 पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट्स पर कस्टम ड्यूटी पूरी तरह खत्म करने का फैसला लिया है। वो भी तीन महीने के लिए। साथ ही सरकार ने साफ संकेत दिए हैं कि उद्योगों को राहत देने के लिए आने वाले दिनों में और फैसले सकते हैं। 

वित्त मंत्रालय ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि यह उपाय घरेलू उद्योगों में आवश्‍यक पेट्रोकेमिकल की उपलब्धता सुनिश्चित कराने के लिए अस्थायी रूप में लिया गया है। मंत्रालय ने कहा कि इससे संबंधित क्षेत्रों पर लागत का दबाव कम होगा और आपूर्ति में स्थिरता आएगी और उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी।

मंत्रालय के मुताबिक पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव को देखते हुए केन्द्र ने घरेलू उद्योगों को बढ़ती लागत और संभावित आपूर्ति श्रृंखला व्यवधानों से बचाने के लिए त्वरित करते हुए बड़ा फैसला लिया है। इसके तहत सरकार ने 40 पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट्स पर कस्टम ड्यूटी को पूरी तरह खत्म कर दिया है। इनमें प्लास्टिक, दवाओं व पेट्रोकेमिकल, मेथनॉल, अमोनिया, टोल्यून, स्टाइरीन, डाइक्लोरोमेथेन और विनाइल क्लोराइड मोनोमर शामिल हैं। यह राहत फिलहाल 3 महीने के लिए लागू होगी। इसका सीधा फायदा उन इंडस्ट्री को मिलेगा जो इन प्रोडक्ट्स पर निर्भर हैं।

सरकार की तरफ से कस्टम ड्यूटी हटाने वाले प्रोडक्ट्स में मुख्य रूप से एनएहाइड्रस अमोनिया, मेथनॉल, टोल्यूनि, स्टाइरीन और विनाइल क्लोराइड मोनोमर जैसे जरूरी इनपुट शामिल हैं। इसके अलावा, पॉलीइथाइलीन और पॉलीप्रोपाइलीन जैसी कैटेगरीज को भी छूट दी गई है, जिनका इस्तेमाल बड़े पैमाने पर मैन्युफैक्चरिंग में होता है। इसके साथ ही फार्मास्युटिकल्स और ऑटोमोटिव पार्ट्स के निर्माण में काम आने वाले एपॉक्सी रेजिन, पॉलीयुरेथेन और फॉर्मल्डेहाइड डेरिवेटिव्स को भी इस लिस्ट में शामिल किया गया है।

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि और फैसले पाइपलाइन में हैं। अलग-अलग मंत्रालय इस पर काम कर रहे हैं, यानी आने वाले दिनों में इंडस्ट्री को और राहत मिल सकती है। दरअसल सरकार मिडिल ईस्ट युद्ध के कारण अब freight cost को लेकर भी चिंता में है। मिडिल ईस्ट संकट के कारण-इंश्योरेंस प्रीमियम बढ़ गया है। शिपिंग रूट लंबे हो गए हैं। इस वजह से माल ढुलाई महंगी हो गई है। सरकार अब इस पर सब्सिडी या सपोर्ट देने की संभावनाओं पर काम कर रही है।

केन्द्र के इस कदम से सड़क और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को राहत-सरकार मिलेगी। साथ ही सड़क परियोजनाओं पर भी असर कम करने के लिए कदम उठाए गये हैं। खास तौर पर यह  देखते हुए कि बिटुमेन और डीजल की कीमतें बढ़ने से प्रोजेक्ट महंगे हो गए हैं। इसे देखते हुए सरकार की योजना अब परियोजनाओं में कच्चे माल की कीमत बढ़ने पर कॉन्ट्रैक्टर को मुआवजा दिये जाने की है।

सरकार यह भी सुनिश्चित कर रही है कि जरूरी कच्चे माल की कमी न हो। ऑयल कंपनियां अब Propene, Butane जैसे इनपुट, LPG से divert करके critical सेक्टर को देंगी। इससे फार्मा और केमिकल सेक्टर को राहत मिलेगी। केन्द्र सरकार का कहना है कि इन कदमों की वजह से भारत पर मिडिल ईस्ट संकट का असर सीमित रहेगा। हालांकि, ग्लोबल ट्रेड दबाव में है। लागत बढ़ रही है। इसे देखते हुए सरकार लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है।

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