मिनियापोलिस (अमेरिका)। भारतीय मूल के एक 47 वर्षीय व्यक्ति को यूनाइटेड हेल्थ ग्रुप की सहायक कंपनी ऑप्टम में वरिष्ठ निदेशक रहते हुए धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग की साजिश सहित कई मामलों में दोषी पाया गया।
मिनियापोलिस (अमेरिका)। भारतीय मूल के एक 47 वर्षीय व्यक्ति को यूनाइटेड हेल्थ ग्रुप की सहायक कंपनी ऑप्टम में वरिष्ठ निदेशक रहते हुए धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग की साजिश सहित कई मामलों में दोषी पाया गया।
छह दिन चली अदालत में सुनवाई
मिनियापोलिस स्थित अमेरिकी जिला न्यायालय में छह दिनों तक चले मुकदमे के बाद करण गुप्ता को वायर फ्रॉड की साजिश रचने, वायर फ्रॉड के दस मामलों और मनी लॉन्ड्रिंग की साजिश के एक मामले में दोषी ठहराया गया।
उच्च वेतन पर था तैनात
अदालती रिकॉर्ड के अनुसार, गुप्ता ऑप्टम में डेटा एनालिटिक्स के वरिष्ठ निदेशक के रूप में कार्यरत थे और उनकी वार्षिक आय 2,60,000 डॉलर से अधिक थी।
अयोग्य मित्र को दिलाई नौकरी
साल 2015 में उन्होंने अपने एक पुराने मित्र को डेटा इंजीनियरिंग के प्रबंधकीय पद पर नियुक्त कराने में मदद की, जबकि वह इस पद के लिए योग्य नहीं था।
फर्जी रिज्यूमे से मिली पोस्ट
न्याय विभाग के अनुसार, गुप्ता ने अपने मित्र के लिए फर्जी रिज्यूमे तैयार कराया, जिसकी मदद से उसे नौकरी मिली और बाद में गुप्ता ही उसका सीधे तौर पर पर्यवेक्षक बन गया।
चार साल तक नहीं किया काम
करीब चार वर्षों तक उस मित्र ने लगभग कोई काम नहीं किया। वह सहकर्मियों से बहुत कम मिलता था, बेहद कम ईमेल भेजता था और कई-कई हफ्तों तक कंपनी के कंप्यूटर में लॉग इन भी नहीं करता था।
फिर भी मिलता रहा मोटा वेतन
इसके बावजूद उसे 1,00,000 डॉलर से अधिक का शुरुआती वेतन मिलता रहा और उसी वेतन का आधा हिस्सा ‘किक बैक’ के रूप में गुप्ता लेता था।
यह भी पढ़े: आयकर ने AI से पकड़ी 70,000 करोड़ की कमाई
https://www.primenewsnetwork.in/state/it-dept-uncovers-70000-cr-black-income-using-ai/144670