कराची में दूध संकट बढ़ा, डेयरी मालिकों ने 100 रुपये प्रति लीटर बढ़ोतरी न मिलने पर उत्पादन बंद की चेतावनी दी, आपूर्ति और गुणवत्ता प्रभावित।
कराची: पाकिस्तान के कराची शहर में दूध का संकट लगातार गहराता जा रहा है। डेयरी उत्पादकों ने सरकार द्वारा दूध की कीमतों में 100 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी को मंजूरी न मिलने पर उत्पादन बंद करने की चेतावनी दी है। डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, इस विवाद के चलते शहर में दूध की उपलब्धता और गुणवत्ता दोनों पर असर पड़ने लगा है।
बढ़ती लागत से परेशान डेयरी उद्योग
डेयरी और पशुपालक संघ (डीसीएफए) का कहना है कि बढ़ती उत्पादन लागत और बेकाबू महंगाई के कारण दुग्ध उत्पादन क्षेत्र गंभीर संकट में पहुंच गया है। कराची आयुक्त को लिखे पत्र में डीसीएफए अध्यक्ष मुशर्रफ कुरैशी मोआवी ने बताया कि पिछले दो वर्षों में पशु आहार, चोकर, खली, साइलेज और अन्य जरूरी सामग्रियों की कीमतों में 60 से 75 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है।
परिवहन और दवाओं का खर्च भी बढ़ा
संघ के मुताबिक, परिवहन खर्च, बिजली शुल्क, ईंधन की कीमतें, पशु चिकित्सा दवाएं, टीके और श्रम लागत में भी भारी इजाफा हुआ है। इससे किसानों के लिए दूध उत्पादन आर्थिक रूप से मुश्किल होता जा रहा है। डीसीएफए ने सरकार से मांग की है कि अगले 48 घंटों के भीतर सभी हितधारकों की आपात बैठक बुलाई जाए ताकि संकट का समाधान निकाला जा सके। संघ के नेता शाकिर उमर गुज्जर ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने कीमतों में संशोधन नहीं किया तो किसान जून से अपने स्तर पर दूध की कीमतें बढ़ा देंगे। उनका दावा है कि दूध उत्पादन की वास्तविक लागत लगभग 300 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर तक पहुंच चुकी है।
पहले ही बढ़ चुकी हैं दूध की कीमतें
हाल ही में नगर प्रशासन ने दूध की कीमतों में 20 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर की वृद्धि को मंजूरी दी थी। इसके बाद 26 अप्रैल से खुदरा कीमत 240 पाकिस्तानी रुपये प्रति किलोग्राम तय की गई थी। इसके बावजूद डेयरी उत्पादक इसे अपर्याप्त बता रहे हैं। कराची के कई इलाकों — सदर, मलिर एक्सटेंशन कॉलोनी, गुलशन-ए-इकबाल और फेडरल बी एरिया — के लोगों ने खुले दूध की खराब गुणवत्ता को लेकर नाराजगी जताई है। उपभोक्ताओं का कहना है कि दूध पतला दिखता है, उसमें अजीब गंध आती है और वह जल्दी खराब हो जाता है।
पाउडर दूध की ओर बढ़ रहे लोग
कई नागरिकों ने बताया कि उन्होंने अब खुले दूध की जगह पाउडर दूध का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि अधिक कीमत होने के बावजूद पाउडर दूध ज्यादा भरोसेमंद साबित हो रहा है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने स्वीकार किया कि पशु आहार की बढ़ती कीमतों और मांस निर्यात के कारण उत्पादन लागत में काफी वृद्धि हुई है। हालांकि, उन्होंने कहा कि पहले से महंगाई की मार झेल रही जनता पर अतिरिक्त बोझ डालने के लिए फिलहाल सरकार तैयार नहीं है। अधिकारी ने यह भी माना कि दूध की गुणवत्ता में गिरावट आई है।
ANI
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