अमेरिका और रूस के बीच 'द न्यू स्टार्ट' समझौता समाप्त हो गया है। अब चिंता का विषय है कि परमाणु परीक्षण बढ़ जाएंगे।
हांगकांग। अमेरिका और रूस के बीच 'द न्यू स्टार्ट' समझौता समाप्त हो गया है। अब चिंता का विषय है कि परमाणु परीक्षण बढ़ जाएंगे। इसी के साथ ही चीन ने सबसे बड़ी परमाणु ताकतों के साथ स्वैच्छिक परमाणु परिसीमन संधि में शामिल होने के निमंत्रण से किनारा कर लिया है।
चीन ने स्वैच्छिक परिसीमन से बनाई दूरी
अमेरिका और रूस के बीच 'न्यू स्टार्ट' संधि पांच फरवरी को समाप्त हो गई। इसमें रणनीतिक हमलावर शस्त्रों को कम करने और सीमित करने पर सहमति बनी थी। इसके समाप्त होने के बाद अमेरिका ने नई परमाणु शस्त्र संधि का आह्वान किया है। इसमें अमेरिका ने खुद को शामिल करते हुए रूस और चीन को जोड़ना चाहता है।
चीन का तेजी से बढ़ता परमाणु भंडार
चीन अपने परमाणु शस्त्रों के भंडार का सबसे तेजी से विस्तार कर रहा। उसकी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी रॉकेट फोर्स के पास 2024 के आखिर तक 600 के करीब परमाणु वार हेड का भंडार है। यह जानकारी पेंटागन की दिसंबर में जारी रिपोर्ट में दी गई है। पेंटागन का कहना है कि यही रफ्तार जारी रही तो 2030 तक चीन का परमाणु वारहेड एक हजार तक पहुंच जाएगा।
शिएनमान चौक पर परमाणु शक्ति का प्रदर्शन
3 सितम्बर 2025 की शिएनमान चौक पर परेड में चीन ने शान से पांच परमाणु शस्त्रों का प्रदर्शन किया था। इसमें डीएफ- 61, डीएफ- 5सी, और डीएफ-31बीजे अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलें, जेएल 1 हवा से छोड़ी जाने वाली परमाणु टाइप मिसाइलें और पनडुब्बी से छोड़ी जाने वाली जेएल 3 मिसाइलें शामिल हैं। पेंटागन का अनुमान है कि पीएलए रॉकेट फोर्स के पास 400 आईसीबीएम और 550 इंटरमीडिएट रेंज बैलिस्टिक मिसाइलें हैं।
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