पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के एक महीने से अधिक समय बीतने के बाद इजरायल के विदेश मंत्रालय की विशेष दूत फ्लेर हसन नाहूम ने एक महत्वपूर्ण बयान दिया है।
जेरूसलम (इजरायल)। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के एक महीने से अधिक समय बीतने के बाद इजरायल के विदेश मंत्रालय की विशेष दूत फ्लेर हसन नाहूम ने एक महत्वपूर्ण बयान दिया है। नाहूम ने अपने बयान से पाकिस्तान के मध्यस्थता कराने की कोशिशों पर पानी फेर दिया है। उन्होंने कहा, "इजरायल और पाकिस्तान के बीच कोई राजनयिक संबंध नहीं होने के बावजूद वे (पाकिस्तान) खुद को प्रासंगिक दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। वे खुद भी जिहादी आतंकवाद की दुनिया में बड़ी समस्या हैं। मुझे संदेह है कि वे ज्यादा सफल होंगे।"
भारत की उभरती भूमिका की सराहना
भारत की भूमिका की सराहना करते हुए नाहूम ने कहा कि भारत-इजरायल का एक बहुत ही करीबी सहयोगी है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की हालिया यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि भारत के सभी पक्षों के साथ बेहतरीन संबंध हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की तुलना में भारत एक कहीं बेहतर और विश्वसनीय मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है।
कई मोर्चों पर जारी क्षेत्रीय संघर्ष
नाहूम ने मध्य पूर्व में जारी युद्ध पर बात करते हुए कहा कि यह स्थिति शुरू से ही एक 'मल्टी-फ्रंट रिजनल कॉन्फ्लिक्ट' यानी एक साथ कई मोर्चों पर लड़ा जाने वाला क्षेत्रीय युद्ध रहा है। उन्होंने कहा कि इजरायल 7 अक्टूबर से ही कई मोर्चों पर संघर्ष का सामना कर रहा है। उन्होंने आगे कहा कि दक्षिण से ईरानी प्रॉक्सी हमास ने हमला किया था। इसके ठीक अगले दिन 8 अक्टूबर को उत्तर से भी हमले शुरू हो गए। ऐसे में इजरायल को एक साथ कई मोर्चों पर युद्ध का सामना करना पड़ा।
विरोधियों की सैन्य शक्ति का खात्मा
पिछले एक महीने के घटनाक्रमों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि इजरायल ने विरोधियों की क्षमताओं को काफी हद तक कमजोर कर दिया है। उन्होंने आगे कहा कि अब तक इस्लामिक रिपब्लिक के 80 प्रतिशत रॉकेट लॉन्चर्स और उनकी पूरी नौसेना को नष्ट कर दिया गया है। इतना ही नहीं, उन्होंने उनके सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व के शीर्ष स्तर को भी पूरी तरह खत्म करने की बात कही है।
अमेरिकी कूटनीति और परमाणु रुख
अमेरिकी दृष्टिकोण और कूटनीति पर चर्चा करते हुए नाहूम ने राष्ट्रपति ट्रंप की रणनीति की सराहना की। उन्होंने कहा कि हर मोड़ पर राष्ट्रपति ट्रंप ने बातचीत और समझौते का मौका दिया है लेकिन इस्लामिक रिपब्लिक की हठधर्मिता के कारण कोई समाधान नहीं निकल सका। उन्होंने इसे एक प्रभावी रणनीति बताया जिसमें एक तरफ बातचीत का विकल्प खुला रखा जाता है तो दूसरी तरफ सैन्य दबाव के जरिए दुश्मन को कमजोर किया जाता है। परमाणु कार्यक्रम के मुद्दे पर उन्होंने स्पष्ट किया कि इजरायल किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि जो शासन इजरायल के विनाश की बात करता हो उसे सामूहिक विनाश के हथियार रखने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
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