पाकिस्तान के कराची में ईसाई संगठनों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने नाबालिग लड़कियों की सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंता ज़ाहिर की।
कराची (पाकिस्तान)। कराची प्रेस क्लब के बाहर विरोध प्रदर्शन भड़क उठे। यहां ईसाई संगठनों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने नाबालिग लड़कियों की सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंता ज़ाहिर की, खासकर उन मामलों में जिनमें कथित तौर पर ज़बरदस्ती शादी और धर्म परिवर्तन शामिल हैं।
ईसाई संगठनों और कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन
स्थानीय मीडिया डॉन के मुताबिक, नेशनल क्रिश्चियन पार्टी और गवाही मिशन ट्रस्ट सहित कई समूहों ने अलग-अलग प्रदर्शन किए, जो समुदाय के भीतर व्यापक चिंता को दर्शाते हैं। प्रदर्शन में महिलाओं और युवा लड़कियों ने भी हिस्सा लिया। वे हाथों में तख्तियाँ लिए हुए थीं और कानूनी सुरक्षा तथा न्याय की माँग करते हुए नारे लगा रही थीं।
समुदाय के नेताओं ने बढ़ती घटनाओं पर जताई गंभीर चिंता
बिशप काशिफ़, शाज़िया समून, शब्बीर शफ़क़त, पादरी सरफ़राज़ विलियम, परवीन परवेज़ और सुल्तान सरदार भट्टी जैसे विरोध प्रदर्शन के नेताओं ने इस बात पर ज़ोर दिया कि ईसाई समुदाय, जो शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के लिए जाना जाता है, अब नाबालिग लड़कियों से जुड़ी बार-बार होने वाली घटनाओं के कारण बढ़ती चिंता का सामना कर रहा है।
अपहरण, जबरन धर्म परिवर्तन और निकाह के आरोपों पर आक्रोश
वक्ताओं ने आरोप लगाया कि नाबालिग लड़कियों का अपहरण किया जा रहा है, उन पर धर्म बदलने का दबाव डाला जा रहा है और उसके बाद उनकी निकाह करा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे कृत्य मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन हैं। इन कुप्रथाओं पर रोक लगाने के लिए कानूनों को और अधिक सख्ती से लागू करने की माँग की। प्रदर्शनकारियों ने अधिकारियों से अपील की कि वे इस मुद्दे को अत्यंत तत्परता और गंभीरता के साथ लें।
'मारिया केस' के फैसले पर सवाल, न्यायपालिका से पुनर्विचार की अपील
प्रदर्शनकारियों ने 'मारिया मामले' से जुड़े हालिया अदालती फैसले पर भी चिंता ज़ाहिर की। उनका तर्क था कि इस फैसले ने लोगों के मन में डर को और बढ़ा दिया है। साथ ही इसने कई गंभीर कानूनी और नैतिक सवाल भी खड़े कर दिए हैं। डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने संघीय संवैधानिक न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की और देश के शीर्ष नेतृत्व- जिसमें राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री भी शामिल हैं- से इस मामले में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया।
कानूनों की खामियों पर उठे सवाल
प्रदर्शनकारियों ने इस कानूनी तर्क पर सवाल उठाया कि जिन नाबालिगों के पास अपने आधिकारिक पहचान पत्र भी नहीं हैं, उन्हें अपने धर्म और शादी के संबंध में स्वयं निर्णय लेने की अनुमति कैसे दी जा सकती है। उन्होंने बाल विवाह के विरुद्ध और अधिक कड़े कानून बनाने तथा मौजूदा कानूनों को सख्ती से लागू करने की माँग की। एकता पर ज़ोर देते हुए प्रदर्शनकारियों ने सभी धार्मिक समुदायों से अपील की कि वे अल्पसंख्यकों के अधिकारों का समर्थन करें और यह सुनिश्चित करें कि कानून के तहत सभी को समान सुरक्षा प्राप्त हो। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इन चिंताओं को नज़रअंदाज़ किया गया तो अल्पसंख्यक समुदायों के बीच असुरक्षा की भावना और भी गहरी हो सकती है।
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