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CEO के फैसलों को बेहतर बनाएगा AI: मैकिन्से

AI से बदल सकता है कंपनियों का कामकाज: संगठन की कार्यक्षमता बढ़ाने में मिलेगी मदद- मैकिन्से

मैकिन्से की रिपोर्ट के मुताबिक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस CEO के अनुभव और निर्णय लेने की प्रक्रिया को कंपनी के साझा ज्ञान में बदलकर कर्मचारियों की कार्यक्षमता बढ़ा सकता है।

ai से बदल सकता है कंपनियों का कामकाज संगठन की कार्यक्षमता बढ़ाने में मिलेगी मदद- मैकिन्से

Representative Image | file photo

नई दिल्ली। मैकिन्से की एक रिपोर्ट के मुताबिक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कंपनियों को चीफ एग्जीक्यूटिव के फैसले लेने के अनुभव और लीडरशिप की जानकारी को कैप्चर करने और इसे पूरे ऑर्गनाइजेशन में एक्सेस करने लायक बनाने में मदद कर सकता है, जिससे फैसले लेने की क्षमता में सुधार हो सकता है और अलग-अलग लीडर्स पर निर्भरता कम हो सकती है।

AI लेगा सीनियर एग्जीक्यूटिव के अनुभव और फैसले

रिपोर्ट में कहा गया है कि AI सीनियर एग्जीक्यूटिव के अनुभव और फैसले को एक शेयर्ड ऑर्गनाइजेशनल रिसोर्स में बदल सकता है, जिससे कर्मचारियों को यह समझने में मदद मिलेगी कि लीडर ऑप्शन का आकलन कैसे करते हैं, जोखिमों का मूल्यांकन कैसे करते हैं और महत्वपूर्ण फैसले कैसे लेते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है, "AI पहली बार जो संभव बनाता है, वह किसी लीडर के तर्क की पहुंच को किसी भी कैलेंडर या ऑर्गनाइजेशनल हायरार्की से कहीं आगे बढ़ाने का एक तरीका है।"

ऐसे सिस्टम को "एग्जीक्यूटिव AI" कहा गया

मैकिन्से ने कहा कि ऐसे सिस्टम, जिन्हें "एग्जीक्यूटिव AI" कहा जाता है, लीडर्स के डॉक्यूमेंट्स, ईमेल, मीटिंग नोट्स और दूसरे वर्क रिकॉर्ड से जानकारी कैप्चर कर सकते हैं ताकि एक नॉलेज बेस बनाया जा सके जिसे कंपनी भर के कर्मचारी एक्सेस कर सकें। इस तरीके में पांच मुख्य काम शामिल हैं, जिनमें लीडरशिप का ध्यान देने वाले मामलों की पहचान करना, फैसले लेने के पैटर्न को रिकॉर्ड करना, रियल टाइम में फैसलों का समर्थन करना, अलग-अलग नजरिए से स्ट्रेटेजी को टेस्ट करना और फैसलों के नतीजों से सीखना शामिल है। रिपोर्ट में एक कंपनी की केस स्टडी पर ज़ोर दिया गया, जिसके चीफ़ एग्ज़ीक्यूटिव ने पिछले साल 1,800 मीटिंग में हिस्सा लिया था, जिनमें से लगभग 500 में कोई फ़ैसला नहीं हुआ और फ़ॉलो-अप की ज़रूरत पड़ी।

कुछ ही महीनों में अप्रूवल के लिए 30 परसेंट ज़्यादा फ़ैसले तैयार

AI-बेस्ड सिस्टम शुरू करने के बाद, ऑर्गनाइज़ेशन ने कुछ ही महीनों में पहली प्रेज़ेंटेशन में अप्रूवल के लिए 30 परसेंट ज़्यादा फ़ैसले तैयार होते देखे। CEO को भेजी जाने वाली शिकायतें भी तेज़ी से कम हुईं, जबकि कंपनी ने लगभग 100 दोबारा इस्तेमाल होने वाले नॉलेज रिसोर्स बनाए, जो लीडरशिप स्टैंडर्ड को डॉक्यूमेंट करते हैं, जो पहले ज़्यादातर बिना डॉक्यूमेंट के रह गए थे। मैकिन्से ने हार्वर्ड बिज़नेस स्कूल की 12 साल की स्टडी का भी ज़िक्र किया, जिसमें पाया गया कि एक औसत CEO हफ़्ते में 62.5 घंटे काम करता है, लेकिन स्ट्रेटेजिक प्रायोरिटी को आगे बढ़ाने में आधे से भी कम समय बिताता है।

एग्ज़ीक्यूटिव को समय वापस पाने में मदद करेगा AI

रिपोर्ट में कहा गया कि AI, बार-बार होने वाले काम को कम करके और ज़रूरी फ़ैसलों की तैयारी में सुधार करके एग्ज़ीक्यूटिव को समय वापस पाने में मदद कर सकता है। अपने अनुभव के आधार पर, मैकिन्से ने कहा कि डिसीज़न सपोर्ट और प्रायोरिटी पहले महीने में ही इस्तेमाल होने वाला समय वापस लाना शुरू कर सकते हैं, जबकि ऑपरेटिंग मॉडल को दो से तीन महीने के एडजस्टमेंट के बाद रीकैलिब्रेट किया जा सकता है। हालांकि, रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि कंपनियों को AI पर बहुत ज़्यादा निर्भरता, अलग-अलग राय में कमी और डेटा एक्सेस और उसे बनाए रखने से जुड़े सवालों जैसे जोखिमों पर ध्यान देना चाहिए। इसमें ज़ोर दिया गया है कि AI को इंसानी फ़ैसलों की जगह लेने के बजाय उन्हें मज़बूत करना चाहिए, और एग्जीक्यूटिव फ़ैसलों की ज़िम्मेदारी लेते रहें।

(इनपुटः ANI)

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