प्राइम न्यूज़ – एक कसम, राष्ट्र प्रथम
Breaking News

सक्रिय यूनिटें व दुर्लभ खनिज भी होंगे शामिल

औद्योगिक उत्पादन सूचकांक में एक और बदलाव की कवायद

केन्द्र सरकार ने आईआईपी में हाल में आयी गिरावट के बाद अखिल भारतीय औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) का आकलन करने के मानकों में बदलाव की सिफारिश की है।

औद्योगिक उत्पादन सूचकांक में एक और बदलाव की कवायद

नई दिल्ली। केन्द्र सरकार देश के औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) का आकलन करने के मानकों में एक बार फिर बदलाव करने की तैयारी में है। केन्द्र सरकार आईआईपी के आधार वर्ष में पहले ही बदलाव कर चुकी है।

पुराने मानक बदले जाएंगे

मालूम हो कि केन्द्र का सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) हर महीने की 28 तारीख को आईआईपी के आंकड़े संकलित कर आईआईपी का डेटा जारी करता है। लेकिन अब सरकार वर्षों पुराने मानकों में बदलाव कर रही है। इसके तहत केंद्र सरकार ने हाल ही में आईआईपी के आधार वर्ष को 2011-12 से अद्यतन करके 2022-23 कर दिया था। इसके बाद अब भारत सरकार औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) को अधिक प्रामाणिक बनाने के लिए इसके आकलन मानकों और कार्यप्रणाली में बड़े बदलाव करने की तैयारी में है। 

अभी तक डेटा में बंद फैक्टरियां भी थीं शामिल

केन्द्र सरकार ने आईआईपी में हाल में आयी गिरावट के बाद अखिल भारतीय औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) का आकलन करने के मानकों में बदलाव की सिफारिश की है। इसके तहत, असंगठित क्षेत्र के लिए अलग सूचकांक तैयार करने का सुझाव दिया गया है। अब तक आईआईपी डेटा में बंद हो चुकी फैक्टरियां भी शामिल हो जाती थीं, लेकिन नए मानकों के तहत बंद कारखानों को हटाकर केवल नई और सक्रिय इकाइयों को शामिल किया जाएगा।

उत्पादक मूल्य सूचकांक के उपयोग की सिफारिश

केन्द्र सरकार द्वारा इस संबध में कहा गया है कि सूचकांक को वर्तमान औद्योगिक वास्तविकताओं के अनुकूल बनाने के लिए नए स्थापित बड़े कारखानों को जोड़कर कारखानों के पैनल का विस्तार किया गया है। साथ ही, खनन क्षेत्र में लघु खनिजों एवं रेयर अर्थ मिनरल्स (दुर्लभ खनिज) को शामिल करने के साथ विनिर्माण क्षेत्र में नए और उभरते उत्पादों को शामिल करने पर जोर दिया गया है। इसके आकलन में उत्पादक मूल्य सूचकांक के उपयोग की भी सिफारिश की गई है।

बदलाव के दौर में आंकड़े भी स्थिर नहीं

सांख्यिकी मंत्रालय की ओर से सोमवार को जारी तकनीकी सलाहकार समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि जब उद्योग तेजी से बदल रहे हों, तब औद्योगिक आंकड़े स्थिर नहीं रह सकते। उसका सुझाव है कि नवीकरणीय और गैर-नवीकरणीय बिजली उत्पादन को अलग-अलग मापा जाए। गैस वितरण, जलापूर्ति, सीवरेज और अपशिष्ट प्रबंधन जैसी गतिविधियों को आईआईपी के दायरे में लाया जाए। देश के IIP उत्पादन गणना नये मानकों के आधार पर की जाएगी। नई श्रृंखला एक जून, 2026 से लागू होगी। इसमें कई नए क्षेत्रों को शामिल किया गया है, जिनसे औद्योगिक गतिविधियों की व्यापक और सटीक तस्वीर सामने आएगी।

इसे भी पढ़ेंः एलआईसी का चौथी तिमाही मुनाफा 23 फीसदी बढ़ा

Related to this topic: