वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध और वैश्विक अर्थव्यवस्था के विखंडन से विश्व जीडीपी में 6.9 ट्रिलियन डॉलर की कमी आ सकती है। फोरम ने महंगाई बढ़ने की भी आशंका जताई है।
नई दिल्ली: विश्व आर्थिक मंच (WEF) की ताजा रिपोर्ट में वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर चेतावनी जारी की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025-26 वैश्वीकरण से भू-आर्थिक विखंडन की ओर एक बड़ा टर्निंग पॉइंट देखने को मिल सकता है। यदि पूर्व और पश्चिम के देशों के बीच पूर्ण आर्थिक अलगाव होता है, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था को GDP में 6.9 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक का भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
उभरते बाजारों पर पड़ेगा बुरा असर
विश्व आर्थिक मंच के मुताबिक, इस विखंडन के कारण पूंजी तक पहुंच कम हो जाएगी, जिसका सबसे गंभीर असर उभरते बाजारों और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ेगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा बिखराव पहले से ही वैश्विक जीडीपी वृद्धि को 213 बिलियन डॉलर से 307 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक कम कर रहा है, जबकि दुनिया भर में मुद्रास्फीति (महंगाई) को 0.2 से 0.3 प्रतिशत अंक तक बढ़ा रहा है। कई देश अप्रत्याशित व्यापार और वित्तीय बाधाओं को अपना रहे हैं, जिससे वैश्विक व्यवसायों के लिए जोखिम बढ़ गया है।
अमेरिका-चीन के बीच 'टैरिफ वार'
रिपोर्ट में अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते व्यापार युद्ध पर विशेष प्रकाश डाला गया है। अमेरिका ने टैरिफ और अन्य प्रतिबंधों के जरिए वैश्विक व्यापार प्रणाली को नया रूप देने का प्रयास किया है, जिसका मुख्य निशाना चीन है। इसके जवाब में चीन ने महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति शृंखलाओं में अपने दबदबा का इस्तेमाल किया और अपने निर्यात का रुख बदला, जिससे उसे 2025 में रिकॉर्ड ट्रेड प्राप्त हुआ। हालांकि, वाशिंगटन ने अपने सहयोगी देशों पर भी टैरिफ बढ़ाए हैं, जिससे जवाबी कार्रवाई का दौर शुरू हो गया है। 2025 में यह टकराव इस कदर बढ़ा कि कुछ समय के लिए टैरिफ 100 प्रतिशत से भी ऊपर चले गए थे।
कमजोर हो रही हैं वैश्विक संस्थाएं
बढ़ते राष्ट्रवाद, भू-राजनीतिक तनाव और घटती संस्थागत वैधता के कारण अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, विश्व बैंक और विश्व व्यापार संगठन जैसे बहुपक्षीय संस्थानों की प्रभावशीलता कमजोर हुई है। WTO की विवाद-निपटान भूमिका कम होने से अब देश द्विपक्षीय समझौतों और स्थानीय मुद्रा में व्यापार निपटाने पर निर्भर हो रहे हैं, जो वित्तीय स्थिरता के लिए जोखिम है। इसके अलावा, केंद्रीय बैंकों की स्वतंत्रता पर भी सरकारों का दबाव बढ़ रहा है।
सबसे खराब स्थिति की चेतावनी
WEF का अनुमान है कि इस नीतिगत उतार-चढ़ाव से अमेरिका में उत्पादन वृद्धि अनुमान से 0.4 से 0.6 प्रतिशत अंक कम रहने की उम्मीद है। जबकि, इंडोनेशिया जैसे देशों पर इसका असर कम (0.1 प्रतिशत अंक की गिरावट) होगा। रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि यदि स्थिति और बिगड़ती है, तो सबसे खराब स्थिति में वैश्विक आर्थिक विकास दर 6.4 प्रतिशत अंक तक गिर सकती है, जबकि महंगाई में 6.1 प्रतिशत अंक तक का उछाल आ सकता है।