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खाड़ी संकट के कारण म्यूचुअल फंडों में निवेश...

खाड़ी संकट के कारण म्यूचुअल फंडों में निवेश 5 फीसदी घटा, एसआईपी में भी गिरावट

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में तनाव और कच्चा तेल मंहगा होने का असर भारतीय शेयर बाजार के साथ ही म्यूचुअल...

खाड़ी संकट के कारण म्यूचुअल फंडों में निवेश 5 फीसदी घटा एसआईपी में भी गिरावट

खाड़ी संकट के कारण म्यूचुअल फंडों में निवेश 5 फीसदी घटा, एसआईपी में भी गिरावट |

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में तनाव और कच्चा तेल मंहगा होने का असर भारतीय शेयर बाजार के साथ ही म्यूचुअल फंडों पर भी पड़ा है। देश में इक्विटी म्यूचुअल फंड योजनाओं में अप्रैल में शुद्ध निवेश मासिक आधार पर पांच फीसदी घटकर 38,440 करोड़ रुपये रह गया। म्यूचुअल फंडों में आयी इस गिरावट को देखते हुए सेबी फंड कंपनियों को राहत छोटे निवेशकों के लिए नई योजना पर काम कर रही है।

एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एम्फी) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार इक्विटी म्यूचुअल फंड योजनाओं में हाल में निवेश में काफी कमी आयी है। ईरान संकट, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक वृद्धि को लेकर चिंता के कारण यह गिरावट आई है।

एम्फी के आंकड़ों के मुताबिक, सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) के जरिये किया जाने वाला मासिक योगदान भी घटकर 31,115 करोड़ रुपये रह गया। जबकि मार्च में यह रिकॉर्ड 32,087 करोड़ रुपये था। हालांकि, म्यूचुअल फंड उद्योग में कुल 3.22 लाख करोड़ का शुद्ध निवेश आया, जबकि मार्च में 2.4 लाख करोड़ रुपये की निकासी हुई थी। इस बढ़त का मुख्य कारण डेट फंड्स में 2.5 लाख करोड़ रुपये का भारी निवेश है। इसके दम पर म्यूचुअल फंड उद्योग की प्रबंधन अधीन संपत्तियां बढ़कर अप्रैल अंत तक 81.92 लाख करोड़ पहुंच गईं, जो मार्च के अंत में 73.73 लाख करोड़ थीं। गोल्ड ईटीएफ में 3,040 करोड़ रुपये का निवेश आया।

म्यूचुअल फंडों में आयी इस गिरावट को देखते हुए सेबी खुदरा निवेशकों की भागीदारी बढ़ाने के लिए वितरकों की एक नई श्रेणी शुरू करने पर विचार कर रहा है। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के पूर्णकालिक सदस्य अमरजीत सिंह ने बुधवार को कहा, इस प्रस्ताव का उद्देश्य बॉन्ड यानी डेट उत्पादों की पहुंच को बढ़ाना है। कम रकम से होने वाले एसआईपी निवेश को बढ़ाने पर ध्यान देने की जरूरत है। 

सेबी के सूत्रों ने बताया कि बॉन्ड बाजार में ऐसे वितरकों कमी है, जो खुदरा निवेशकों के लिए निवेश प्रक्रिया को सरल बना सकें। इसमें केवाईसी प्रावधान, दस्तावेजीकरण और लेनदेन शामिल है। इसके अलावा सेबी ने म्यूचुअल फंड कंपनियों को नकदी प्रबंधन के लिए एकदिनी (इंट्राडे) उधार के इस्तेमाल में अधिक लचीलापन देने का प्रस्ताव रखा है। परामर्श पत्र में सेबी ने कहा, एएमसी को मार्जिन भुगतान और मौजूदा कर्ज चुकाने के लिए भी इंट्राडे उधारी की अनुमति दी जा सकती है।

अगर सुविधा नहीं होगी तो फंड प्रबंधकों के लिए एक ही दिन में खरीद-बिक्री के फैसले लागू करना मुश्किल होगा, जिस स्कीम के रिटर्न प्रभावित होंगे।

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