राज्य में जांच के दौरान विभिन्न जिलों से लिए गए बोतलबंद पेयजल नमूनों में हानिकारक कोलिफार्म बैक्टीरिया पाए गए हैं, जिससे स्वास्थ्य पर खतरा है।
लखनऊ। आम तौर पर लोग बोतलबंद मिनरल वाटर को सुरक्षित मानते हैं। लेकिन प्रदेश के खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग द्वारा राज्य के विभिन्न जनपदों से संकलित बोतलबंद पेयजल में स्वास्थ्य के लिए हानिकारक काेलिफार्म बैक्टीरिया पाए गए हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम द्वारा संकलित किए गए सील पैक पेयजल के नमूनों की खाद्य विश्लेषक प्रयोगशाला लखनऊ में जांच कराई थी।
कई जिलों के पानी के नमूने फेल
खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार राजधानी लखनऊ समेत गोंडा, अंबेडकरनगर, बाराबंकी, रायबरेली, लखीमपुर खीरी तथा गोरखपुर, चित्रकूट, वाराणसी, उन्नाव, रामपुर, मैनपुरी, आजमगढ़, प्रयागराज और चंदौली आदि से संकलित बोतलबंद पेयजल में काेलिफार्म बैक्टीरिया पाए गए हैं, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।
बिक्री रोकने और स्टॉक वापस मंगाने के निर्देश
यूपी की खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की आयुक्त डॉ. रोशन जैकब ने संबंधित वाटर प्लांट और पानी की खेप की बिक्री पर रोक लगाने के साथ ही बाजार में पहुंच चुके पानी को वापस मंगाने के निर्देश दिए हैं।
इंदौर की घटना के बाद हुई देशभर में जांच
विभाग ने बताया कि गत वर्ष दिसंबर में इंदौर के भागीरथपुर में पेयजल में खतरनाक वायरस मिलने के बाद देशभर में जांच अभियान चलाया गया था। इसी जांच के दौरान अंबेडकरनगर के अकबरपुर में एक्वा हेल्थ नामक निर्मल वाटर कंपनी के सील पेयजल में काेलिफार्म बैक्टीरिया पाया गया।
पोषक तत्व भी तय मात्रा से कम मिले
अन्य जिलों के बोतलबंद पानी में भी उक्त बैक्टीरिया पाए जाने की पुष्टि हुई है। इसके साथ ही कई नमूनों में कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे जरूरी तत्व निर्धारित मात्रा से कम मिले हैं।
स्वास्थ्य के लिए कितना खतरनाक है यह बैक्टीरिया
उक्त ब्रांड के सील बंद पानी की बोतलों के नमूने प्रयोगशाला जांच में असुरक्षित पाए गए हैं। इनमें अधिकांश में कोलिफार्म बैक्टीरिया मिला। कोलिफार्म बैक्टीरिया, विशेषकर फीकल कोलिफार्म और ई. कोलाई से दूषित पानी या भोजन का सेवन करने से गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।
दस्त से लेकर टाइफाइड तक का खतरा
इन बैक्टीरिया से संक्रमित पानी पीने पर दस्त, उल्टी, पेट में ऐंठन, दर्द, बुखार और मिचली जैसी समस्याएं हो सकती हैं। विभाग के अनुसार ये बैक्टीरिया आंतों में संक्रमण फैलाते हैं, जिससे पेचिश, टाइफाइड और हैजा जैसी बीमारियां हो सकती हैं। वहीं ई-कोलाई के कुछ खतरनाक स्ट्रेन गंभीर आंतों के संक्रमण, रक्तस्राव और यहां तक कि गुर्दे की विफलता का कारण भी बन सकते हैं।
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