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बिकवाली से सेंसेक्स और निफ्टी में तेज गिरावट

बाजार क्यों टूटा? सेंसेक्स 1,124.02 अंक गिरा, महंगा कच्चा तेल और कमजोर रुपया बढ़ा रहे चिंता

सेंसेक्स 1,124.02 अंक और निफ्टी 1.56% गिरा। महंगे कच्चे तेल, ऊंची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और कमजोर रुपये से बढ़ा दबाव। जानें सेक्टरवार हाल और आम लोगों पर संभावित असर।

बाजार क्यों टूटा सेंसेक्स 112402 अंक गिरा महंगा कच्चा तेल और कमजोर रुपया बढ़ा रहे चिंता

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नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को तेज बिकवाली हुई। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों 1.5% से ज्यादा गिरकर बंद हुए। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, अमेरिकी सरकारी बॉन्ड पर ऊंचे प्रतिफल और कमजोर रुपये ने महंगाई, आयात खर्च और विदेशी निवेश को लेकर चिंता बढ़ाई।

सेंसेक्स 1,124.02 अंक यानी 1.52% गिरकर 72,771.72 पर बंद हुआ। निफ्टी 50 भी 360.25 अंक यानी 1.56% की गिरावट के साथ 22,780.25 पर आ गया। दबाव लगभग सभी क्षेत्रों के शेयरों में दिखा।

बाजार के मुख्य आंकड़े: कहां कितनी गिरावट दर्ज हुई?

  • सेंसेक्स: 72,771.72 पर बंद; 1,124.02 अंक या 1.52% की गिरावट।
  • निफ्टी 50: 22,780.25 पर बंद; 360.25 अंक या 1.56% नीचे।
  • निफ्टी PSU बैंक: 3.20% से ज्यादा टूटा।
  • ब्रेंट क्रूड: रिपोर्ट लिखे जाने के समय 3% से ज्यादा बढ़कर 107.88 डॉलर प्रति बैरल।
  • 24 कैरेट सोना: रिपोर्ट के समय 2.5% से ज्यादा गिरकर 1,47,100 रुपये प्रति 10 ग्राम।
  • चांदी: रिपोर्ट के समय 3.25% घटकर 2,26,988 रुपये प्रति किलोग्राम।

बाजार पर दबाव की तीन वजहें: तेल, बॉन्ड और कमजोर रुपया

PL Capital के चीफ बिजनेस ऑफिसर—एडवाइजरी एंड डीलिंग विक्रम कसाट के मुताबिक, इस बिकवाली के पीछे कई वैश्विक आर्थिक दबाव एक साथ काम कर रहे हैं। इसे केवल घरेलू अर्थव्यवस्था की कमजोरी से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।

पहली वजह, महंगा कच्चा तेल: कसाट ने ब्रेंट क्रूड के 106 डॉलर से ऊपर पहुंचने पर चिंता जताई। सोमवार को रिपोर्ट लिखे जाने तक इसकी कीमत 3% से ज्यादा बढ़कर 107.88 डॉलर प्रति बैरल हो गई। भारत जैसी तेल आयात करने वाली अर्थव्यवस्थाओं के लिए इससे ऊर्जा की लागत बढ़ने की आशंका है।

दूसरी वजह, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड: अमेरिका के 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड करीब 5.2% थी। यील्ड का मतलब बॉन्ड की मौजूदा कीमत के आधार पर मिलने वाला प्रतिफल है। कसाट के अनुसार, ऊंची अमेरिकी यील्ड ने भारत जैसे उभरते बाजारों में विदेशी पूंजी के प्रवाह को लेकर चिंता बढ़ाई है।

तीसरी वजह, रुपये की कमजोरी: रुपया कमजोर होकर 96 रुपये प्रति डॉलर की ओर बढ़ रहा था। कसाट ने कहा कि इन तीनों परिस्थितियों से महंगाई और आयात लागत को लेकर दबाव बढ़ा है।

सरकारी बैंकों में सबसे ज्यादा मार, आईटी में कम गिरावट

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी NSE के लगभग सभी सेक्टर सूचकांक लाल निशान में बंद हुए। सरकारी बैंकों के शेयरों वाला निफ्टी PSU बैंक सूचकांक सबसे ज्यादा प्रभावित सूचकांकों में शामिल रहा।

सेक्टर सूचकांक गिरावट
निफ्टी PSU बैंक 3.20% से ज्यादा
निफ्टी रियल्टी 2.32%
निफ्टी ऑयल एंड गैस 1.97%
निफ्टी मेटल 1.90%
निफ्टी ऑटो 1.74%
निफ्टी FMCG 1.38%
निफ्टी IT 0.09%

रियल्टी सूचकांक में संपत्ति कारोबार से जुड़ी कंपनियां आती हैं। FMCG में रोजमर्रा के इस्तेमाल का सामान बनाने वाली कंपनियां शामिल होती हैं। इनके मुकाबले सूचना प्रौद्योगिकी यानी IT क्षेत्र में गिरावट सीमित रही।

निफ्टी में सिर्फ दो शेयर बढ़े, बाकी पर बिकवाली का दबाव

निफ्टी 50 में केवल डॉ. रेड्डीज और इन्फोसिस के शेयर बढ़त के साथ बंद हुए। सबसे ज्यादा गिरने वाले शेयरों में जियो फाइनेंस, अदाणी एंटरप्राइजेज, TMPV, टाटा कंज्यूमर और बजाज ऑटो शामिल रहे। इससे स्पष्ट है कि बिकवाली का असर कुछ चुनिंदा कंपनियों तक सीमित नहीं रहा।

मध्य पूर्व में तनाव से तेल की आपूर्ति को लेकर चिंता

Ventura के हेड ऑफ कमोडिटी एंड CRM एन. एस. रामास्वामी के मुताबिक, मध्य पूर्व से तेल आपूर्ति में लंबे व्यवधान की नई आशंकाओं के बीच ब्रेंट क्रूड का नवंबर वायदा फिर 106 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया। वायदा सौदा भविष्य की तय अवधि में खरीद-बिक्री से जुड़ा अनुबंध होता है।

रामास्वामी ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने का ईरान का प्रस्ताव खारिज किए जाने से इस अहम समुद्री रास्ते को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। उनके मुताबिक, ईरान अब भी अमेरिका की स्पष्ट प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहा है।

उन्होंने सऊदी अरब और हूतियों के बीच ऊंचे तनाव का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, सऊदी अरब ने ड्रोन रोके हैं और क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर चिंताएं फिर बढ़ी हैं। ये परिस्थितियां कच्चे तेल की कीमतों को सहारा दे रही हैं।

कच्चे तेल के किन स्तरों पर विशेषज्ञ की निगाह टिकी है?

रामास्वामी ने ब्रेंट क्रूड के लिए 108–109 डॉलर प्रति बैरल को तत्काल प्रतिरोध का स्तर बताया। प्रतिरोध वह कीमत क्षेत्र है, जहां तेजी को रुकावट मिल सकती है।

उनके मुताबिक, कीमत इस दायरे से ऊपर टिकती है तो 112 डॉलर और 115 डॉलर की ओर बढ़ने की गुंजाइश बन सकती है। नीचे की ओर उन्होंने 104 डॉलर, 101 डॉलर और 97 डॉलर को समर्थन स्तर बताया—यानी ऐसे स्तर जहां गिरावट को सहारा मिल सकता है। ये उनके तकनीकी आकलन हैं, निश्चित भाव नहीं।

आगे बाजार की दिशा किन वैश्विक बदलावों से तय होगी?

कसाट के मुताबिक, कच्चे तेल में लगातार तेजी या विदेशी संस्थागत निवेशकों की और निकासी से बाजार में उतार-चढ़ाव ऊंचा रह सकता है। विदेशी संस्थागत निवेशक वे बड़े विदेशी फंड या संस्थान हैं, जो बाजार में निवेश करते हैं।

इसके उलट, अमेरिका-ईरान तनाव, कच्चे तेल की कीमतों या अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी बाजार को स्थिर होने की गुंजाइश दे सकती है। कसाट ने निवेशकों को चुनिंदा कंपनियों पर ध्यान देने और उनकी भविष्य की कमाई की स्पष्टता तथा बैलेंस शीट की मजबूती देखने की सलाह दी। बैलेंस शीट से कंपनी की संपत्तियों, देनदारियों और वित्तीय स्थिति का पता चलता है।

आम उपभोक्ताओं की जेब पर क्या संभावित असर पड़ सकता है?

महंगा कच्चा तेल और कमजोर रुपया भारत में तेल आयात की लागत बढ़ा सकते हैं। यह दबाव लंबे समय तक बना रहा तो कंपनियों की लागत और महंगाई पर असर पड़ सकता है। हालांकि, स्रोत रिपोर्ट में पेट्रोल-डीजल या किसी उपभोक्ता उत्पाद की खुदरा कीमत बढ़ने की घोषणा नहीं है।

सोना-चांदी भी फिसले, एशियाई बाजारों का रुख मिला-जुला

कमोडिटी यानी जिंस बाजार में भी कमजोरी रही। रिपोर्ट लिखे जाने के समय 24 कैरेट सोना 2.5% से ज्यादा गिरकर 1,47,100 रुपये प्रति 10 ग्राम था। चांदी 3.25% घटकर 2,26,988 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई। एशिया के शेयर बाजारों में एक जैसी दिशा नहीं दिखी। जापान और दक्षिण कोरिया के प्रमुख सूचकांक गिरे, जबकि सिंगापुर और हांगकांग में बढ़त रही।

बाजार सूचकांक बंद स्तर बदलाव
जापान निक्केई 225 66,230 0.20% गिरावट
दक्षिण कोरिया KOSPI 6,889 2.77% गिरावट
सिंगापुर स्ट्रेट्स टाइम्स 5,729 0.31% बढ़त
हांगकांग हैंगसेंग 24,626 0.47% बढ़त

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सोमवार को शेयर बाजार में इतनी तेज गिरावट क्यों आई?
महंगे कच्चे तेल, करीब 5.2% की अमेरिकी 10 वर्षीय बॉन्ड यील्ड और 96 रुपये प्रति डॉलर की ओर कमजोर होते रुपये ने महंगाई, आयात खर्च और विदेशी निवेश को लेकर चिंताएं बढ़ाईं।

किस सेक्टर को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ?
रिपोर्ट में बताए गए सेक्टरों में निफ्टी PSU बैंक सबसे ज्यादा गिरा। इसमें 3.20% से ज्यादा की गिरावट रही। निफ्टी रियल्टी 2.32% और निफ्टी ऑयल एंड गैस 1.97% नीचे रहे।

क्या महंगे कच्चे तेल से पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ गए हैं? 
रिपोर्ट में पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमत बढ़ने की जानकारी नहीं है। इसमें कच्चे तेल की महंगाई से आयात और ऊर्जा लागत पर संभावित दबाव बताया गया है।

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