सीमेंट के निर्माण में भारी मात्रा में ईंधन (पेटकोक और कोयला) और परिवहन का उपयोग होता है। कच्चे माल और डीजल की कीमतों में वृद्धि से सीमेंट कंपनियों पर भारी वित्तीय दबाव है।
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और कच्चे तेल व गैस में उछाल के कारण पेट्रोल और डीजल कंपनियों के साथ ही सीमेंट कंपनियों को भी भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। सीमेंट उद्योग का मानना है कि इस घाटे की भरपाई के लिए सीमेंट कंपनियां भी जल्द ही कीमतें बढ़ा सकती हैं।
सीमेंट उद्योग पर सीधा प्रभाव
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। इसका सीधा असर ईंधन से लेकर सीमेंट उद्योग तक पड़ रहा है। कच्चे तेल में उछाल की वजह से हाल में सीमेंट की बोरियों और अन्य पैकिंग मैटेरियल की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है। साथ ही उत्पादन और माल ढुलाई की लागत बढ़ने से सीमेंट कंपनियों के मुनाफे में भारी कमी दर्ज की गई है।
कंपनियों पर भारी दबाव
सीमेंट के निर्माण में भारी मात्रा में ईंधन (पेटकोक और कोयला) और परिवहन का उपयोग होता है। कच्चे माल और डीजल की कीमतों में वृद्धि से सीमेंट कंपनियों पर भारी वित्तीय दबाव है। सीमेंट कंपनियां इस घाटे की भरपाई के लिए आने वाले दिनों में सीमेंट की कीमतों में बढ़ोतरी कर सकती हैं। माना जा रहा है कि सीमेंट कंपनियां जल्द ही सीमेंट के दाम 5 से 7 रुपये प्रति बोरी तक बढ़ा सकती हैं।
कंपनियों की लागत प्रति टन 80 रुपये तक बढ़ी
अंतर्राष्ट्रीय ब्रोकरेज फर्म "नोमुरा" ने ताजा रिपोर्ट में कहा, ईंधन और पैकेजिंग खर्च में 5 फीसदी की बढ़ोतरी से कंपनियों की लागत प्रति टन 80 रुपये तक बढ़ गई है, जिसकी भरपाई के लिए दाम बढ़ाना मजबूरी है। कंपनियों ने इस साल अप्रैल में भी सीमेंट के दाम करीब 10 रुपये प्रति बोरी बढ़ाए थे। मई की शुरुआत में भी 5 रुपये की वृद्धि की घोषणा की गई थी।
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