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कार्रवाई निगरानी और विनियामक निरीक्षण का हिस्सा

पश्चिम बंगालः आरबीआई ने वित्तीय कंपनियों सहित 130 के लाइसेंस रद्द कर दिए

आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि पंजीकरण प्रमाण पत्र रद्द होने के बाद, ये कंपनियां आरबीआई अधिनियम, 1934 की धारा 45-I के खंड (क) के तहत परिभाषित गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्था का कारोबार नहीं करेंगी।

पश्चिम बंगालः आरबीआई ने वित्तीय कंपनियों सहित 130  के लाइसेंस रद्द कर दिए

मुंबई (महाराष्ट्र) । भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 135 गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) के पंजीकरण प्रमाणपत्र (CoR) रद्द कर दिए हैं। प्रभावित कंपनियों में से अधिकांश कोलकाता और पश्चिम बंगाल के अन्य हिस्सों में पंजीकृत हैं। 10 जून को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में, केंद्रीय बैंक ने कहा कि उसने भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 45-IA (6) के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए पंजीकरण रद्द किए हैं। यह कार्रवाई कई राज्यों में फैली NBFCs पर लागू होती है, हालांकि सूचीबद्ध कंपनियों में से अधिकांश कोलकाता और पश्चिम बंगाल के आसपास के क्षेत्रों में स्थित हैं।

लाइसेंस रद होने वाली सूची में कई नामी कंपनियां

सूची में अक्षय फिस्कल सर्विसेज लिमिटेड, अल्फा टाई-अप प्राइवेट लिमिटेड, अरिहंत एंटरप्राइजेज लिमिटेड, डेस्टिनी इंटरनेशनल लिमिटेड, ईस्टर्न सिंथेटिक्स प्राइवेट लिमिटेड, ईटीएल इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस लिमिटेड, गेटवे फिनकॉन्स इंडिया लिमिटेड, केपीएस फाइनेंस एंड ट्रेड (पी) लिमिटेड, लाइफटाइम फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड और कोलकाता से संचालित होने वाली कई अन्य कंपनियां शामिल हैं। पश्चिम बंगाल स्थित कंपनियों के अलावा, आरबीआई के आदेश में महाराष्ट्र, तेलंगाना, दिल्ली, मणिपुर, तमिलनाडु और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों की कुछ गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थाओं (एनबीएफसी) को भी शामिल किया गया है। इनमें मुंबई स्थित एस्सेल फाइनेंस बिजनेस लोन्स लिमिटेड, हैदराबाद स्थित सिटीवाइड फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड और चेन्नई स्थित किरनग्लोबल बिजनेस इन्वेस्टमेंट लिमिटेड शामिल हैं। केंद्रीय बैंक द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, रद्द की गई संस्थाओं को मूल रूप से 1998 और 2022 के बीच पंजीकरण प्रमाण पत्र प्राप्त हुए थे। इस सूची में वे कंपनियां भी शामिल हैं जो पंजीकरण रद्द होने से पहले कई वर्षों तक एनबीएफसी के रूप में कार्यरत थीं। आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि पंजीकरण प्रमाण पत्र रद्द होने के बाद, ये कंपनियां आरबीआई अधिनियम, 1934 की धारा 45-I के खंड (क) के तहत परिभाषित गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्था का कारोबार नहीं करेंगी।

कार्रवाई निगरानी और विनियामक निरीक्षण का हिस्सा

आरबीआई ने अपनी अधिसूचना में कहा, "इस प्रकार, उपरोक्त कंपनियां आरबीआई अधिनियम, 1934 की धारा 45-I के खंड (क) में परिभाषित गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्था का कारोबार नहीं करेंगी।" यह ताजा कार्रवाई आरबीआई द्वारा गैर-बैंकिंग वित्तीय क्षेत्र पर जारी निगरानी और विनियामक निरीक्षण का हिस्सा है, जिसके तहत विनियामक आवश्यकताओं को पूरा करने में विफल रहने वाली संस्थाओं का पंजीकरण रद्द किया जा सकता है और उनके एनबीसी गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है। (एएनआई)

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