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भारत में बैंकों से कर्ज लेकर महिलाएं बन रहीं...

भारत में बैंकों से कर्ज लेकर महिलाएं बन रहीं आत्मनिर्भर

नई दिल्ली। भारत में कुल बैंकिंग कर्ज के मामले में महिला कर्जदारों की हिस्सेदारी में हाल के महीनों में भारी उछाल आया है...

भारत में बैंकों से कर्ज लेकर महिलाएं बन रहीं आत्मनिर्भर

भारत में बैंकों से कर्ज लेकर महिलाएं बन रहीं आत्मनिर्भर |

नई दिल्ली। भारत में कुल बैंकिंग कर्ज के मामले में महिला कर्जदारों की हिस्सेदारी में हाल के महीनों में भारी उछाल आया है। वर्ष 2017 से अब तक महिला कर्जदारों की संख्या में 4.8 गुना की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। नीति आयोग द्वारा जारी आंकडों के मुताबिक बैंक कर्ज में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़कर 26 प्रतिशत तक पहुंच गई है। उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में भी महिला कर्जदारों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है।

नीति आयोग (NITI Aayog) की अप्रैल 2026 की रिपोर्ट "From Borrowers to Builders" के अनुसार, भारत में बैंकिंग कर्ज में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़कर 26% (₹76 लाख करोड़) हो गई है। 2017 से अब तक महिला कर्जदारों की संख्या में 4.8 गुना की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो यह दर्शाता है कि महिलाएं अब छोटे कर्ज से आगे बढ़कर व्यावसायिक और बड़े बिजनेस और खुदरा कर्ज लेकर तेजी से आत्मनिर्भर बन रही हैं। यह बदलाव न केवल वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) बल्कि महिलाओं की आर्थिक मजबूती और उद्यमिता की ओर एक बड़ा कदम है। 

नीति आयोग की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत के कुल बैंकिंग कर्ज में महिला कर्जदारों की हिस्सेदारी 26 प्रतिशत तक पहुंच गई है। वित्त वर्ष 2025 के आंकड़ों के मुताबिक, महिलाओं का कर्ज अब 76 लाख करोड़ हो गया है। वर्ष 2017 में महिलाओं का कुल ऋण पोर्टफोलियो केवल 16 लाख करोड़ रुपये था और पिछले आठ सालों के दौरान इसमें 4.8 गुना की वृद्धि हुई है। 2022 से 2025 के बीच, महिला उद्यमियों को दिए जाने वाले वाणिज्यिक कर्ज में 31 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई।

इसकी तुलना में कुल वाणिज्यिक ऋण की रफ्तार केवल 16 प्रतिशत रही। रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में लगभग 16 करोड़ महिलाएं सक्रिय कर्जदार हैं। हालांकि, अभी भी लगभग 45 करोड़ ऐसी महिलाएं हैं जो ऋण लेने के लिए पात्र हैं लेकिन बैंकिंग सिस्टम से पूरी तरह नहीं जुड़ी हैं।

नीति आयोग की सीईओ, निधि छिब्बर ने बताया कि डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर और औपचारिक ऋण प्रणालियों के उपयोग ने महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को बदल दिया है। अब महिलाएं केवल व्यक्तिगत जरूरतों के लिए नहीं, बल्कि खुदरा और व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए ऋण ले रही हैं। डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण ऋण तक पहुंच आसान हुई है, जिससे महिलाएं 'माइक्रोफाइनेंस' (छोटे कर्ज) से निकलकर बड़े व्यापार की ओर बढ़ रही हैं।

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