भारतीय संगीत इतिहास की सबसे प्रतिष्ठित और बहुमुखी आवाज़ों में से एक, आशा भोसले का रविवार को निधन हो गया। ब्रीच कैंडी अस्पताल के डॉ. प्रतीत समदानी ने उनके निधन की पुष्टि की।
मुंबई (महाराष्ट्र)। भारतीय संगीत इतिहास की सबसे प्रतिष्ठित और बहुमुखी आवाज़ों में से एक, आशा भोसले का रविवार को निधन हो गया। उन्होंने अपने पीछे एक ऐसी विरासत छोड़ी है जिसने आठ दशकों से अधिक समय तक भारतीय सिनेमा और संगीत की दुनिया को आकार दिया। वे 92 वर्ष की थीं।
अस्पताल में इलाज के दौरान ली अंतिम सांस
ब्रीच कैंडी अस्पताल के डॉ. प्रतीत समदानी ने उनके निधन की पुष्टि की। डॉ. समदानी ने कहा, "आशा भोसले ने आज ब्रीच कैंडी अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनका निधन मल्टी-ऑर्गन फेल्योर के कारण हुआ।" बता दें कि उन्हें शनिवार शाम अत्यधिक थकान और छाती में संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
परिवार ने पहले दी थी स्वास्थ्य की जानकारी
उनकी पोती ज़नाई भोसले ने पहले सोशल मीडिया के माध्यम से उनकी अस्पताल में भर्ती होने की जानकारी दी थी और परिवार की निजता बनाए रखने की अपील की थी। उन्होंने कहा था, "मेरी दादी आशा भोसले को अत्यधिक थकान और छाती में संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उनका इलाज जारी है और उम्मीद है कि सब ठीक होगा।"
आठ दशकों तक संगीत जगत पर रहा राज
सन 1933 में जन्मी आशा भोसले ने बहुत कम उम्र में अपना संगीत सफर शुरू किया था। 1950 के दशक में उन्हें पहचान मिली और आगे चलकर वे दुनिया की सबसे प्रसिद्ध पार्श्व गायिकाओं में से एक बन गईं। उनकी आवाज़ ने कई पीढ़ियों के संगीत प्रेमियों को प्रभावित किया। अपने लंबे करियर में उन्होंने हजारों गाने रिकॉर्ड किए, जो कई भारतीय भाषाओं में थे। उन्होंने शास्त्रीय संगीत, ग़ज़ल, कैबरे, पॉप और लोक संगीत जैसे कई अलग-अलग शैली के गीत गाए।
सम्मान और उपलब्धियों से भरा रहा जीवन
प्रमुख संगीतकारों और फिल्म निर्माताओं के साथ उनके काम ने हिंदी सिनेमा के कई यादगार गीत दिए, जिससे वे एक स्थायी सांस्कृतिक प्रतीक बन गईं। इन्हें कई सम्मान मिले, जिनमें दादासाहेब फाल्के पुरस्कार और भारत का दूसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण शामिल है। साल 2011 में गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने उन्हें संगीत इतिहास में सबसे अधिक गाने रिकॉर्ड करने वाली कलाकार के रूप में मान्यता दी थी। अपने जीवन के अंतिम वर्षों में भी वे संगीत से जुड़ी रहीं। कभी-कभी मंच पर प्रस्तुति देती थीं और नई पीढ़ी के कलाकारों को प्रेरित करती थीं। उनका प्रभाव सिर्फ पार्श्व गायन तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने भारतीय संगीत में महिला आवाज़ की भूमिका को भी नई पहचान दी।
हर सुर में बसी थी बहुमुखी प्रतिभा, देशभर में शोक
आशा भोसले की बहुमुखी प्रतिभा अद्भुत थी। उन्होंने 'दिल चीज़ क्या है' जैसी भावपूर्ण ग़ज़लें, 'पिया तू अब तो आजा' जैसे चुलबुले गीत, 'मेरा कुछ सामान' जैसे गहरे भावों वाले गीत और 'चुरा लिया है तुमने' जैसे लोकप्रिय गाने गाए। लोक संगीत से लेकर पॉप तक, उनकी आवाज़ भारतीय संगीत की एक अनोखी पहचान बनी रही। उनके निधन की खबर से पूरे देश में शोक की लहर है। प्रशंसक, कलाकार और कई सार्वजनिक हस्तियां उनके योगदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं।
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